इस मुलाकात के वक्त सीएम देवेंद्र फडणवीस नागपुर में थे और एनसीपी नेता व डिप्टी सीएम अजित पवार अपने निर्वाचन क्षेत्र बारामती में।
हालांकि, बीजेपी और एनसीपी ने इसे ‘साधारण शिष्टाचार मुलाकात’ बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शिंदे ने अमित शाह के सामने अपने गठबंधन सहयोगियों – खासकर अजित पवार – को लेकर असंतोष जताया। सूत्रों का दावा है कि शिंदे ने अपने विभागों में हस्तक्षेप, बजट आवंटन में भेदभाव और प्रशासनिक नियुक्तियों में उपेक्षा को लेकर शिकायत की।
शिंदे की नाराजगी के कारण
शिवसेना का आरोप है कि अजित पवार, जो राज्य के वित्त मंत्री भी हैं, उन्होंने बजट आवंटन में पक्षपात किया है। शिवसेना के मंत्रियों के विभागों को अपेक्षाकृत कम बजट दिया गया, जबकि बीजेपी और एनसीपी के मंत्रियों को प्राथमिकता दी गई। इसके अलावा मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा मंत्रियों के निजी सहायक या विशेष कार्य अधिकारियों की नियुक्तियों को खारिज किया गया, जिससे भी शिवसेना नेतृत्व नाराज है। MSRTC के अध्यक्ष पद पर संजय सेठी की नियुक्ति ने भी विवाद खड़ा किया था। शिवसेना के विरोध के बाद उनकी जगह अंततः शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक को नियुक्त किया गया। इसी तरह नीति आयोग की तर्ज पर बनाए गए राज्य स्तरीय थिंक टैंक ‘MITRA’ में शिंदे के करीबी अजय अशर को सेवा विस्तार न देने और उनकी जगह एनसीपी नेता दिलीप वलसे पाटिल को नियुक्त करने से शिवसेना नेताओं में और भी असंतोष गहराया।
बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक, एकनाथ शिंदे को जून 2022 में मुख्यमंत्री बनाए जाने के समय व्यापक अधिकार प्राप्त थे, लेकिन 2024 में एनसीपी के साथ हुए गठबंधन के बाद सत्ता संतुलन बदल गया है। विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद महायुति के भीतर राजनीतिक ताकत का अनुपात बदल गया है, जिससे शिंदे को अब पहले जैसी स्वतंत्रता नहीं मिल पा रही है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह मुलाकात राज्य और मुंबई में चल रही विकास परियोजनाओं को लेकर थी। वहीं, अमित शाह ने भी स्पष्ट किया कि महायुति के घटकों के बीच कोई मनमुटाव नहीं है और सब कुछ ठीक है। लेकिन अंदरूनी सूत्र इस बातचीत को "मौसम और क्रिकेट की चर्चा" मानने को तैयार नहीं हैं।
शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “अमित शाह और एकनाथ शिंदे की मुलाकात का एजेंडा निश्चित रूप से राजनीति और प्रशासन से जुड़ा था, न कि महज औपचारिकताओं का आदान-प्रदान।”





