यह डेटा डिजिटल अधिकार संगठन एक्सेस नाउ और नागरिक समाज संगठनों के #KeepItOn अभियान द्वारा संकलित रिपोर्ट "Emboldened Offenders, Endangered Communities: 2024" में सामने आया है।
रिपोर्ट बताती है कि लोकतांत्रिक देशों में भारत लगातार इंटरनेट शटडाउन की घटनाओं में पहले स्थान पर बना हुआ है। हालांकि, 2024 में म्यांमार ने भारत को पीछे छोड़ दिया। म्यांमार की स्थिति को देखते हुए यह अपेक्षित था, लेकिन एक लोकतांत्रिक देश होते हुए भी भारत में इतनी अधिक बार इंटरनेट शटडाउन होना गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
इंटरनेट बैन: वैश्विक स्तर पर बढ़ता संकट
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में कुल 54 देशों में 296 बार इंटरनेट शटडाउन दर्ज किए गए, जो 2023 में 39 देशों में 283 शटडाउन के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गया। यह 35% की वृद्धि को दर्शाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस साल पहली बार 7 देशों ने इंटरनेट बंद करने की नीति अपनाई, जिससे स्पष्ट होता है कि यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
इस बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता, नागरिक विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया जाता है। इंटरनेट बंद करने को लेकर सरकारें अब और अधिक आक्रामक रणनीतियाँ अपना रही हैं—जैसे उपकरणों को जाम करना, केबल काटना, बुनियादी ढांचे को नष्ट करना और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर दबाव बनाना।
भारत में इंटरनेट शटडाउन: कौन से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित?
भारत में 2024 में 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इंटरनेट सेवाओं को बाधित किया गया। इनमें मणिपुर (21 शटडाउन), हरियाणा (12) और जम्मू-कश्मीर (12) सबसे अधिक प्रभावित रहे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 84 में से 41 शटडाउन विरोध प्रदर्शनों के कारण लगाए गए, जबकि 23 मामले सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े हुए थे।
भारत में इंटरनेट बंद करने की प्रवृत्ति नई नहीं है। 2023 में, भारत ने 116 बार इंटरनेट शटडाउन किया था, और 2019 के बाद से यह लगातार इस सूची में सबसे ऊपर बना हुआ है।
म्यांमार में 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद इंटरनेट शटडाउन को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया। 2024 में म्यांमार ने 85 बार इंटरनेट सेवाएं बंद कीं, जिनमें से 31 घटनाएँ गंभीर मानवाधिकार हनन के मामलों से जुड़ी थीं।
म्यांमार की सैन्य सरकार ने 74 बार इंटरनेट शटडाउन लागू किए, जिनमें से कम से कम 17 बार हवाई हमलों के साथ इंटरनेट सेवाओं को बाधित किया गया।
इस डिजिटल ब्लैकआउट का असर सिर्फ म्यांमार तक सीमित नहीं रहा। चीन और थाईलैंड ने भी म्यांमार की सीमाओं पर इंटरनेट प्रतिबंध लगाए।
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