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लोकसभा डिप्टी स्पीकर के लिए अयोध्या के अवधेश पर दाँव लगा सकता है इंडिया गठबंधनट

राममंदिर जिस अयोध्या में है, वहीं बीजेपी को हराकर सांसद बने हैं सपा के दलित नेता अवधेश प्रसाद

लोकसभा डिप्टी स्पीकर के लिए अयोध्या के अवधेश पर दाँव लगा सकता है इंडिया गठबंधनट
फोटो: लोकसभा डिप्टी स्पीकर के लिए अयोध्या के अवधेश पर दाँव लगा सकता है इंडिया गठबंधनट
लोकसभा अध्यक्ष पद के चुनाव में पाँव पीछे खींचने के बाद इंडिया गठबंधन अब उपाध्यक्ष पद पर दाँव लगाने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इंडिया गठबंधन उपाध्यक्ष पद के लिए समाजवादी पार्टी के फैजाबाद(अयोध्या) से सांसद अवधेश प्रसाद को इस पद पर प्रत्याशी बना सकता है। 78 वर्षीय अवधेश एक दलित चेहरा है और उस सीट से जीतकर आए जिस पर राममंदिर की वजह से बीजेपी  की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई थी। अवधेश प्रसाद लोकसभा में अक्सर अखिलेश  यादव के साथ पहली सीट पर बैठते हैं। अवधेश प्रसाद लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं और उन्हें सपा संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता रहा है।

 

ममता ने रखा प्रस्ताव 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उपाध्यक्ष पद के लिए अवधेश प्रसाद के नाम का प्रस्ताव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिया है। ममता ने केंद्रीय मंत्री रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से फ़ोन पर बात कर अवदेश प्रसाद का नाम दिया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और शिवसेना(यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे समेत आम आदमी पार्टी और डीएमके ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

इंडिया गठबंधन सपा सांसद को उम्मीदवार बनाकर संविधान और लोकतंत्र को बचाने की अपनी मुहिम को मजबूत करना चाहता है क्योंकि अवधेश प्रसाद दलित चेहरा हैं। सपा सांसद की उम्मीदवार से दलित समुदाय में एक सकारात्मक संदेश जाएगा। लोकसभा अध्यक्ष पद पर इंडिया गठबंधन ने कांग्रेस के के. सुरेश को उम्मीदवार बनाया था। के.सुरेश भी दलित समुदाय से आते हैं।

इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के बाद समाजवादी पार्टी के पास ही सबसे ज्यादा सांसद हैं।  बीजेपी की ओर से अभी तक इस पद के लिए किसी के नाम का प्रस्ताव नहीं दिया गया है। लेकिन विपक्ष ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए पहले ही अपना प्रत्याशी चयन कर लिया है।



क्यों महत्वपूर्ण है डिप्टी स्पीकर का पद 

 संविधान के अनुच्छेद 95 के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना स्पीकर का। डिप्टी स्पीकर, स्पीकर का काम तब संभलता हैं जब यह पद खाली हो गया हो या फिर स्पीकर मौजूद न हो। संविधान में डिप्टी स्पीकर को उतनी ही शक्तियां प्राप्त हैं जितनी स्पीकर को। अगर डिप्टी स्पीकर का पद भी खाली है, तो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त सदस्य सांसद का कार्यभार संभालता हैं। अगर लोकसभा का स्पीकर अपना इस्तीफा देना चाहता हैं तो वह अपना इस्तीफा डिप्टी स्पीकर को ही देता हैं। अगर डिप्टी स्पीकर का पद खाली होता है तो स्पीकर लोकसभा के महासचिव को अपना इस्तीफा सौंपता हैं।