Molitics Logo
होम सुप्रीम कोर्ट से इमरान प्रतापगढ़ी को मिली राहत, गुजरात के सामूहिक विवाह वीडियो पर नहीं होगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट से इमरान प्रतापगढ़ी को मिली राहत, गुजरात के सामूहिक विवाह वीडियो पर नहीं होगी कार्रवाई

गुजरात के जामनगर में आयोजित एक सामूहिक विवाह समारोह के दौरान भड़काऊ गीत के साथ संपादित वीडियो पोस्ट करने के मामले में कांग्रेस सांसद और कवि इमरान प्रतापगढ़ी |

सुप्रीम कोर्ट से इमरान प्रतापगढ़ी को मिली राहत, गुजरात के सामूहिक विवाह वीडियो पर नहीं होगी कार्रवाई
फोटो: Imran Pratapgarhi, Kejriwal
गुजरात के जामनगर में आयोजित एक सामूहिक विवाह समारोह के दौरान भड़काऊ गीत के साथ संपादित वीडियो पोस्ट करने के मामले में कांग्रेस सांसद और कवि इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान लिया गया था, जिसमें गुजरात हाईकोर्ट ने इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने प्रतापगढ़ी की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई की और गुजरात सरकार तथा शिकायतकर्ता किशनभाई दीपकभाई नंदा को नोटिस जारी किया।

यह मामला 2 जनवरी को सोशल मीडिया 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट करने से संबंधित है, जिसमें इमरान प्रतापगढ़ी सामूहिक विवाह समारोह में हिस्सा लेते हुए फूलों की बारिश के बीच लोगों का अभिवादन करते नजर आ रहे थे। वीडियो के बैकग्राउंड में जो गीत बज रहा था, उसे शिकायतकर्ता किशन नंदा ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने और हिंसा को भड़काने वाला बताया था। किशन नंदा ने आरोप लगाया कि इस वीडियो से समाज में अशांति फैल सकती है और इसके कारण धार्मिक उन्माद बढ़ सकता है।

 एफआईआर और संबंधित धाराएँ 


वीडियो के पोस्ट होने के बाद, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ यूजर्स ने इसे सीरिया और इराक जैसी हिंसक स्थितियों से जोड़ दिया। पुलिस के अनुसार, वीडियो में जो आवाज सुनाई दे रही थी, वह संभवत: इमरान प्रतापगढ़ी की हो सकती है। इस मामले में प्रतापगढ़ी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 57 भी लगाई गई थी, जो 10 या उससे अधिक लोगों को अपराध करने के लिए उकसाने के आरोप में है। इस धारा के तहत प्रतापगढ़ी को सात साल तक की सजा हो सकती थी। **सामूहिक विवाह समारोह की विशेषताएँ** यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम जामनगर में अल्ताफ खाफी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित हुआ था, जिसमें 51 जोड़ों की शादी हुई। 

इमरान प्रतापगढ़ी को इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। समारोह के दौरान प्रतापगढ़ी ने कई जोड़ों को आशीर्वाद दिया और इस दौरान उनका स्वागत फूलों की बारिश के साथ किया गया। हालांकि, उसी समय पोस्ट किए गए वीडियो को लेकर विवाद उठ गया, जिससे मामला पुलिस और न्यायालय तक पहुंच गया। 

 गुजरात हाईकोर्ट का फैसला 


एफआईआर दर्ज होने के बाद, इमरान प्रतापगढ़ी ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया, जहां उन्होंने अपनी याचिका दायर की थी और एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति संदीप भट्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और कोर्ट को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 या संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करने का कोई कारण नहीं दिखाई देता। 

 सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी को राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न करने का आदेश दिया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर आगे की सुनवाई के लिए गुजरात सरकार और शिकायतकर्ता किशनभाई दीपकभाई नंदा को नोटिस जारी किया। इस फैसले से इमरान प्रतापगढ़ी को एक बड़ी राहत मिली है, क्योंकि अब उन्हें गुजरात सरकार की ओर से कोई दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

 यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बन गया है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का यह वीडियो और उस पर चल रही कानूनी कार्रवाई ने राज्य में राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। इस बीच, गुजरात सरकार और विरोधी पार्टी के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। यह मामला सोशल मीडिया के उपयोग और उसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि आजकल किसी भी वीडियो या पोस्ट का वायरल होना और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाएँ जल्दी से फैलती हैं, जिससे कई बार सामाजिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। 

 यह मामला इस बात का भी प्रतीक है कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से न केवल व्यक्तिगत जीवन बल्कि समाज और राजनीति पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। अदालतों का यह कर्तव्य बनता है कि वे ऐसे मामलों में सावधानी से निर्णय लें, ताकि किसी भी व्यक्ति या समूह के अधिकारों का उल्लंघन न हो और साथ ही सामाजिक समरसता भी बनी रहे। अब देखना होगा कि गुजरात सरकार और अन्य संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।