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“राजनीति करने वाले, धर्म पर बोलना बंद कर दें, तो मैं भी राजनीति पर नहीं बोलूंगा” - शंकराचार्य

"पीएम मोदी से इतने पाप करवाए जा रहे है, इतने अशास्त्रीय काम करवाए जा रहे हैं, इतने मंदिर तुड़वाये जा रहे हैं, इन सब का यमराज के दरबार में पीएम मोदी क्या ज़वाब देंगे?"

“राजनीति करने वाले, धर्म पर बोलना बंद कर दें, तो मैं भी राजनीति पर नहीं बोलूंगा” - शंकराचार्य
फोटो: “राजनीति करने वाले, धर्म पर बोलना बंद कर दें, तो मैं भी राजनीति पर नहीं बोलूंगा” - शंकराचार्य
महाराष्ट्र में मंगलवार को ज्योतिर्मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बड़ी बात कह दी  जिसको लेकर राजनीति गरमाई गई है। शंकराचार्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राजनीति करने वाले लोग धर्म में हस्तक्षेप करना बंद कर दें, तो वह भी राजनीति के बारें में बोलना बंद कर देंगे। शंकराचार्य की यह प्रतिक्रिया तब आई, जब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने शंकराचार्य के उस बयान की आलोचना की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख़ "उद्धव ठाकरे के साथ विश्वासघात हुआ है। विश्वासघात हिंदू धर्म में सबसे बड़ा पाप है। उद्धव ठाकरे के साथ जो हुआ है, उससे बहुत लोगों के मन में पीड़ा हुई है। उनके दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर यह पीड़ा दूर होगी।" उद्धव ठाकरे के बुलावे पर शंकराचार्य उनके घर मातोश्री गए थे।

शंकराचार्य ने कहा, "उनसे बड़ा पीएम मोदी का कोई हितेषी नहीं है, क्योंकि एक दिन जब पीएम मोदी के प्राण निकलेंगे, उनको भी यमराज के पास जाना है। पीएम मोदी से इतने पाप करवाए जा रहे है, इतने अशास्त्रीय काम करवाए जा रहे हैं, इतने मंदिर तुड़वाये जा रहे हैं, इन सब का यमराज के दरबार में पीएम मोदी क्या ज़वाब देंगे?"


निरुपम ने क्या कहा

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। निरुपम ने कहा कि शंकराचार्य तय नहीं करेंगे कि महाराष्ट्र का कौन सीएम बनेगा और कौन नहीं? उन्होंने कहा कि पहले तो यह तय होना चाहिए कि विश्वासघात किसने किया है? उन्होंने कहा कि राजनीति शंकराचार्य का कार्यक्षेत्र नहीं है, उन्हें इस विषय पर नहीं बोलना चाहिए। वह धर्म और अध्यात्म पर बोलें और हमारा मार्गदर्शन करें। शंकराचार्य हमारे धार्मिक गुरु हैं। लेकिन उनका राजनीति पर बोलना ठीक नहीं है, क्योंकि यह उनका कार्यक्षेत्र नहीं है।

निरूपम के बयान पर पलटवार करते हुए शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि अगर किसी को शंकराचार्य के बयान पर आपत्ति है, तो इसका मतलब है कि वह हिंदुत्व को नहीं मानता है। ग़ौरतलब है कि निरुपम लोकसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हुए थे।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस साल जनवरी में अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में जाने से भी इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा का काम शास्त्र के हिसाब से नहीं हो रहा है, इसलिए कोई भी शंकराचार्य मंदिर के कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा।