जांच के तहत व्यापारी को अधिकारी के सरकारी आवास पर बुलाया गया, जहां अधिकारी ने रिश्वत की रकम लेकर उसे अपने टेबल की दराज में रख दिया। उसी समय सतर्कता विभाग की टीम ने अधिकारी को पकड़ लिया।
अधिकारी के सरकारी आवास पर छापेमारी के दौरान 47 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जिससे भ्रष्टाचार का मामला और भी गंभीर हो गया। बरामद रकम ने यह साबित किया कि अधिकारी लंबे समय से अवैध गतिविधियों में लिप्त हो सकता है। बयान में यह भी बताया गया कि सतर्कता विभाग ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
सूत्रों के अनुसार, यह रिश्वत एक व्यापारी से व्यापारिक मंजूरी से संबंधित दस्तावेजों को स्वीकृति देने के बदले में मांगी गई थी। हालांकि, इस मामले की तह तक जाने के लिए सतर्कता विभाग की जांच जारी है।
यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन के लिए शर्मनाक है, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
सतर्कता विभाग की इस कार्रवाई ने जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी अधिकारी की संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह कितने समय से इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में संलिप्त था।
इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सतर्कता विभाग को त्वरित जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।





