दरअसल, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उन्हें बीजेपी में शामिल होने का ऑफर दिया था। खट्टर ने कहा था कि शैलजा का कांग्रेस में अपमान किया जा रहा है। इतनी बड़ी नेता होने के बावज़ूद जहाँ उन्हें चुनाव में प्रचार करना चाहिए, इसकी बजाय वह घर बैठी हुई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने उनका अपमान किया है। दूसरी तरफ़, शैलजा को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए बीएसपी और बीजेपी की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद का ऑफर दिए जाने की भी ख़बर उड़ रही थी। इधर, हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि हरियाणा का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित न किये जाने और विधानसभा चुनाव का टिकट न मिलने की वज़ह से शैलजा कांग्रेस से नाराज़ चल रही है।
सीएम की दावेदारी पर शैलजा
सिरसा की सांसद ने कहा कि उन्हें विधानसभा का टिकट नहीं दिए जाने का फैसला पार्टी की तरफ़ से किया गया है। सीएम पद के लिए उन्होंने कहा कि पद की दावेदारी कोई भी कर सकता है। पद की दावेदारी करने का एक सीनियोरिटी लेवल भी होता है, जिसके आधार पर उन्होंने अपनी बात पार्टी के सामने रखी, जिसका खामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
अपने राजनीतिक जीवन को लेकर शैलजा ने कहा कि वह आज जहाँ है, वहाँ तक पहुँचने के लिए उन्हें तीन पीढ़ी तक का समय लग गया। इस दौरान कुछ लोग ऐसे भी है, जो अभी तक उनके साथ बने हुए है। सभी को साथ में लेकर चलना होता है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि वह आज जहाँ है उसका लाभ उनके समुदाय को भी मिले। इसके लिए हरियाणा को लेकर उनका एक विज़न है, ऐसा नहीं है कि हाल ही में जो कुछ हुआ, उसके बाद उनका प्रदेश को लेकर जो विज़न था वह ख़त्म हो गया है, बल्कि वह अभी भी है।





