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गृह मंत्रालय ने आतंकवाद पर कसा शिकंजा, 67 संगठनों को प्रतिबंधित सूची में किया शामिल

इस सूची में 45 संगठनों को यूएपीए की धारा 35 के तहत आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि शेष 22 समूहों को धारा 3(1) के तहत गैरकानूनी संघ |

गृह मंत्रालय ने आतंकवाद पर कसा शिकंजा, 67 संगठनों को प्रतिबंधित सूची में किया शामिल
फोटो: गृह मंत्रालय ने आतंकवाद पर कसा शिकंजा, 67 संगठनों को प्रतिबंधित सूची में किया शामिल
गृह मंत्रालय (MHA) ने हाल ही में एक अद्यतन सूची जारी की है, जिसमें 67 संगठनों को आतंकवादी या गैरकानूनी संघ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ये संगठन भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माने गए हैं और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस सूची में 45 संगठनों को यूएपीए की धारा 35 के तहत आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि शेष 22 समूहों को धारा 3(1) के तहत गैरकानूनी संघ घोषित किया गया है। इन संगठनों की गतिविधियाँ उग्रवाद, अलगाववाद और हिंसा से जुड़ी रही हैं, जिसके चलते सरकार समय-समय पर ऐसी सूची को अपडेट करती है। प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना और आतंकवाद को जड़ से खत्म करना है।

आतंकवादी संगठनों की सूची


इस सूची में बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान कमांडो फोर्स, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट (ISIS), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA), और माओवादी संगठनों सहित कई अन्य समूह शामिल हैं। इनमें से कई संगठनों ने भारत में हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है।

इसके अलावा, कुछ संगठनों को गैरकानूनी संघों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इनमें स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI), लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE), इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF), सिख फॉर जस्टिस (SFJ), पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और इसके सहयोगी संगठन शामिल हैं। इन संगठनों पर भारत में अस्थिरता फैलाने और समाज में वैमनस्यता को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं।

सरकार का रुख और नीतियाँ


भारत सरकार का उद्देश्य आतंकवाद और चरमपंथ को जड़ से खत्म करना है। किसी संगठन को आतंकवादी घोषित करने के बाद, उसके संचालन पर प्रतिबंध लगाया जाता है, उसकी वित्तीय संपत्तियाँ जब्त की जाती हैं और उसके सदस्यों की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाती है। सरकार का यह कदम देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और आतंकवाद से मुक्त वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यूएपीए के तहत इन संगठनों को प्रतिबंधित करना भारत की आतंरिक सुरक्षा को मजबूत करने का हिस्सा है, जिससे देश में कानून और व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

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