वहीं, निफ्टी 23,319.35 अंक पर खुला था और दिन के दौरान यह 23,222 तक लुढ़क गया। सुबह 10:35 बजे तक निफ्टी 201.05 अंक गिरकर 23,281.10 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि सेंसेक्स 579 अंक गिरकर 76,926.57 पर था। इस भारी गिरावट ने भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों को संकट में डाल दिया है और उनके निवेश की बड़ी रकम का नुकसान हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ फैसले से वैश्विक बाजारों में हलचल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा और मैक्सिको पर 25 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने का ऐलान किया है। वहीं, अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार चीन पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया गया है। इन फैसलों ने वैश्विक व्यापार पर गहरे प्रभाव डाले हैं और निवेशकों के बीच अस्थिरता पैदा की है। ट्रंप का यह कदम केवल अमेरिका के अपने व्यापारिक साझेदारों से संबंधित नहीं है, बल्कि इससे पूरी दुनिया के व्यापारिक माहौल में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
जियोजीत फाइनेंशियल के विजयकुमार का कहना है "यह समझना महत्वपूर्ण है कि ट्रंप का यह कदम मैक्सिको और कनाडा से गैरकानूनी तरीके से पलायन को रोकने के लिए लिया गया है। हालांकि, इस फैसले से केवल इन देशों पर ही असर नहीं पड़ेगा, बल्कि ट्रंप भविष्य में और देशों के खिलाफ भी यही नीति अपना सकते हैं। चीन पर 10 प्रतिशत का टैरिफ़ लगाया गया है, लेकिन अभी तक चीन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, चीन डब्ल्यूटीओ (विश्व व्यापार संगठन) में इस मामले को लेकर दखल दे सकता है।"
भारत पर मंडराता खतरा
अमेरिका और भारत के बीच व्यापार घाटा 3.5 प्रतिशत है, और इस कारण यह संभावना जताई जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत पर भी टैरिफ़ लगा सकते हैं, ताकि व्यापार घाटा कम किया जा सके। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में पहले ही एल्युमिनियम और स्टील पर टैरिफ़ लगाया था, और अब यह आशंका जताई जा रही है कि वह अन्य भारतीय उत्पादों पर भी टैरिफ़ बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, ट्रंप का ब्रिक्स देशों के समूह के प्रति नकारात्मक रवैया भी चिंता का कारण बन रहा है, क्योंकि उन्होंने कई बार इस समूह के खिलाफ बयान दिए हैं।
इसके अलावा, एशियाई बाजारों की स्थिति भी बहुत खराब है, और इन बाजारों की गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। एशियाई देशों के प्रमुख शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, जिससे भारतीय बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ी। साथ ही, डॉलर इंडेक्स का मजबूत होना भी भारतीय स्टॉक मार्केट के लिए नकारात्मक संकेत साबित हो रहा है, क्योंकि इससे रुपये की गिरावट हो सकती है और विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से बाहर निकलने का दबाव बढ़ सकता है।
रिजर्व बैंक की द्विमासिक बैठक पर सबकी निगाहें
इन सभी घटनाओं के बीच, निवेशकों की नजरें रिजर्व बैंक की द्विमासिक बैठक पर भी टिकी हुई हैं, जो आगे आने वाली आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों को लेकर अहम फैसले ले सकती है। भारतीय बाजार में इस समय अनिश्चितता का माहौल है, और ऐसे समय में रिजर्व बैंक की नीतियों का असर निवेशकों की भावनाओं और बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
इन सभी घटनाओं और वैश्विक कारकों के कारण भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई है, और निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इन परिस्थितियों में बाजार में स्थिरता की उम्मीद करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, और निवेशकों को सतर्क रहकर फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।
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