विधेयक का उद्देश्य और प्रावधान
मुख्यमंत्री ने "हरियाणा ट्रैवल एजेंटों का पंजीकरण एवं विनियमन विधेयक, 2025" को 18 मार्च को विधानसभा में पेश किया था। विधेयक के अनुसार—
राज्य में कार्यरत सभी ट्रैवल एजेंटों को सरकार के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
बिना रजिस्ट्रेशन ट्रैवल एजेंसी चलाना अपराध माना जाएगा, जिससे अवैध प्रवास और धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके।
ट्रैवल एजेंटों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के सख्त प्रावधान किए गए हैं।
विधेयक पारित होने से पहले सदन में लंबी बहस हुई। विपक्षी कांग्रेस ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की, ताकि इसमें और भी सुझाव जोड़े जा सकें। हालांकि, बहुमत से विधेयक को मंजूरी दे दी गई।
यह फैसला अमेरिका द्वारा अवैध भारतीय प्रवासियों को निर्वासित किए जाने के बीच आया है, जिनमें से कई हरियाणा और पंजाब से थे। इन लोगों ने 'डंकी रूट' के जरिए अमेरिका में प्रवेश किया था—यह एक गैरकानूनी और खतरनाक मार्ग है, जिसका इस्तेमाल ट्रैवल एजेंट लोगों को अवैध रूप से विदेश भेजने के लिए करते हैं।
इससे पहले 2024 में भी एक विधेयक प्रस्तावित किया गया था, लेकिन केंद्र सरकार की आपत्तियों के बाद इसे वापस ले लिया गया था। सरकार ने नए आपराधिक कानूनों को ध्यान में रखते हुए संशोधित विधेयक पेश किया, जिसे बुधवार को मंजूरी मिल गई।
इस नए कानून के जरिए राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नागरिक धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों का शिकार न हों। इसके अलावा, ट्रैवल एजेंसियों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी जोर दिया गया है।
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