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हरियाणा: मोदी की रैलियों में पूर्व सीएम खट्टर को नहीं मिली जगह, वोट कटने का ख़तरा

मुख्यमंत्री रहते हुए खट्टर के कार्यकाल में किसान आंदोलन और जाट आरक्षण आंदोलन ने उनकी छवि को नकारात्मक बना दिया है, इन समुदाय के वोट बीजेपी के खाते में से किसी अन्य पार्टी में न चले जाये, इसलिए बीजेपी ने खट्टर को हाशिए पर धकेल दिया है।

हरियाणा: मोदी की  रैलियों में पूर्व सीएम खट्टर को नहीं मिली जगह, वोट कटने का ख़तरा
फोटो: हरियाणा: मोदी की रैलियों में पूर्व सीएम खट्टर को नहीं मिली जगह, वोट कटने का ख़तरा
हरियाणा में प्रधानमंत्री मोदी की दो रैली में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की ग़ैर-मौज़ूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए है। सोमवार को पीएम मोदी की सोनीपत में रैली थी, जहाँ खट्टर नहीं दिखे। ख़बर है कि खट्टर को रैली में शामिल नहीं होने दिया गया। इस से पहले पीएम मोदी की 14 सितंबर की की रैली में भी केंद्रीय मंत्री खट्टर ग़ैर-मौज़ूद रहे। इसने हरियाणा के राजनीतिक गलियारों में एक नयी चर्चा खड़ी कर दी है। हरियाणा की राजनीति में खट्टर एक ख़ास अहमियत रखते है। पंजाबी समुदाय में खट्टर काफी पॉपुलर नेता है, ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर खट्टर की ग़ैर-मौजूदगी के क्या कारण हो सकते है। ऐसा कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री रहते हुए खट्टर के कार्यकाल में किसान आंदोलन और जाट आरक्षण आंदोलन ने उनकी छवि को नकारात्मक बना दिया है, इन समुदाय के वोट बीजेपी के खाते में से किसी अन्य पार्टी में न चले जाये, इसलिए बीजेपी ने खट्टर को हाशिए पर धकेल दिया है।

बीजेपी ने 2014 में मुख्यमंत्री के तौर पर खट्टर को चुनकर बीजेपी के ही कई नेताओं को हैरान कर दिया था। खट्टर का नाम अचानक से मुख्यमंत्री के तौर पर सामने निकल कर आया। कथित तौर पर खट्टर को चुने जाने में आरएसएस की भी भूमिका मानी जाती है, लेकिन सार्वजनिक तौर पर कहा जाता है कि खट्टर का चुनाव पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने किया था। मुख्यमंत्री के तौर पर खट्टर को चुने जाने पर पंजाबी समुदाय के बीच काफ़ी उत्साह देखा गया था।


मुख्यमंत्री के तौर पर खट्टर

मुख्यमंत्री खट्टर पर आरोप है कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उन्होंने मामले को बड़ी बेरहमी के साथ संभाला था। आंदोलन में आरोप लगाया गया था कि हरियाणा के मुरथल के एक ढ़ाबे में कुछ आंदोलकारियों ने महिलाओं का गैंगरेप किया, लेकिन इस मामले में पुलिस को जाट समुदाय के ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला। एक तरफ़ तो खट्टर सरकार ने जाट आरक्षण आंदोलन को कुचला, वहीं दूसरी तरफ़ जाट और पंजाबी समुदाय को आपस में बाँट कर रख दिया। भाजपा शासित राज्यों में समुदायों को बांटने की राजनीति आज भी जारी है। हरियाणा में भाजपा के नेताओं का कहना है कि बीजेपी गैर-जाट, पिछड़े और पंजाबी वोटों को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है, उनका मानना है कि वे अभी भी बीजेपी के पीछे एकजुट हो सकते हैं, जैसा कि वे 2014 और 2019 के चुनावों में रहे। लेकिन पंजाबी, पिछड़ों और अन्य गैर जाट बिरादरियों में खट्टर को लेकर इतनी नकारात्मकता है कि बीजेपी के लिए इन समुदाय को अपनी तरफ़ करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी परिणाम अभी तक बीजेपी के पक्ष में जाते हुए नहीं दिख रहे है।

मोदी-शाह इस बात को पहले ही भांप गये थे तो उन्होंने हरियाणा चुनाव की घोषणा से पहले ही खट्टर को सीएम पद से हटाकर नायब सिंह सैनी को वहां बैठा दिया। खट्टर को केंद्र में मंत्री बना दिया गया। लेकिन भाजपा का यह फॉर्मूला भी फेल होता दिख रहा है।