हरीश रावत ने कहा कि इस बिल के पीछे केंद्र सरकार की जिद है, और इसका परिणाम देश की एकता और शांति पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। उनका मानना है कि जब देश में एकता और शांति की स्थिति कमजोर होगी, तो इसका सीधा असर देश के विकास पर पड़ेगा। इसके अलावा, भारत के महान बनने के लक्ष्य से भी हम थोड़ा पीछे हट सकते हैं। रावत ने कहा कि इस बिल का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह अल्पसंख्यकों को और अधिक हाशिए पर धकेल सकता है, जिससे सामाजिक समरसता प्रभावित होगी।
इसके साथ ही हरीश रावत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान में भाजपा की स्थिति ऐसे दलों के सहारे मजबूत हो रही है, जो केवल बैसाखी का काम कर रहे हैं। उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों जैसे नीतीश कुमार (जेडीयू), चंद्रबाबू नायडू (टीडीपी) और चिराग पासवान (लोक जनशक्ति पार्टी) को चेतावनी दी है कि जल्द ही वे इस बिल के परिणामों को समझेंगे और इस पर अपना रुख स्पष्ट करेंगे। रावत का यह कहना था कि यह बिल केंद्र सरकार की जिद का परिणाम है, जो अंततः समाज में और अधिक विभाजन पैदा करेगा और देश की एकता और समृद्धि के लिए खतरनाक हो सकता है।
Read This Also:- ‘वक़्फ़ बिल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का सोचा-समझा तरीका, जल्दबाज़ी में सब कुछ हुआ’- रामगोपाल यादव
Read This Also:- ‘वक़्फ़ बिल सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का सोचा-समझा तरीका, जल्दबाज़ी में सब कुछ हुआ’- रामगोपाल यादव





