विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
मंत्री गौड़े ने 25 मई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी कल्याण मंत्रालय में कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए थे। अपने भाषण में उन्होंने कहा था, "आदिवासी कल्याण विभाग को करदाताओं के पैसे का बड़ा हिस्सा मिलता है, लेकिन प्रशासन कमजोर हो गया है। ठेकेदारों की फाइलें चुपचाप श्रम शक्ति भवन की इमारत के नीचे निपटाई जाती हैं, उनसे पैसे लिए जाते हैं और फिर फाइलें जमा करने को कहा जाता है।”
गौड़े ने यह भी कहा था कि उन्होंने आदिवासी भवन के लिए अपनी निजी जमीन दी थी और बतौर मंत्री उस परियोजना की आधारशिला रखी थी, लेकिन अब निर्माण कार्य ठप पड़ा है। उनके इस बयान के बाद मुख्यमंत्री सावंत ने उन्हें 'गैर-जिम्मेदाराना बयानों' के लिए कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके जवाब में गौड़े ने कहा कि उनकी बातों को मीडिया में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
गोविंद गौड़े एक चर्चित रंगकर्मी से राजनेता बने हैं और गोवा की प्रियोल विधानसभा सीट से विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले वे बीजेपी में शामिल हुए थे और तब से मंत्री पद पर आसीन थे।
यह पहला मौका नहीं है जब पार्टी के भीतर से सरकार पर सवाल उठाए गए हों। कुछ महीने पहले पूर्व मंत्री पांडुरंग मडकईकर ने भी बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि “मंत्री पैसे गिनने में व्यस्त हैं” और “गोवा में लूट जारी है।” मडकईकर के बयान के बाद पार्टी में काफी खलबली मची थी।
गोविंद गौड़े को कैबिनेट से बाहर किया जाना न केवल बीजेपी के भीतर अनुशासन लागू करने की कोशिश मानी जा रही है, बल्कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी के अंदर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।





