रिपोर्ट सामने आने के बाद, मंगलवार को फ़ैज़ाबाद सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने बीजेपी पर जमकर हमला बोला। सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि मुसलमानों के प्रति सीएम योगी की मानसिकता बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि घटना को लेकर सपा प्रमुख़ अखिलेश यादव को पहले से ही शक था, इसलिए उन्होंने मामले में डीएनए जाँच की मांग की थी। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख सहित उन्हें पूरा यक़ीन था कि मोइद खान के ख़िलाफ़ डीएनए टेस्ट का नतीजा नकारात्मक होगा। प्रदेश की योगी सरकार भी यह सच जानती थी, इसके बाद भी उन्होंने सपा नेता के घर को बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया। सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि विशेष समुदाय के प्रति झूठी ख़बरों के आधार पर कार्रवाई करना देश की एकता, भाईचारे और सौहार्द के लिए अच्छा नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला
ख़बरों के अनुसार, दलित नाबालिग़ लड़की मदरसे में दिहाड़ी मज़दूरी पर काम करती थी। आरोप है कि अयोध्या के स्थानीय मदरसा में मई के मध्य से लेकर ढाई महीने तक सांसद मोईद और राजू द्वारा उसके साथ बार-बार बलात्कार किया गया। नाबालिग़ के साथ बलात्कार की घटना तब सामने आई, जब पीड़िता गर्भवती हो गई। 30 जुलाई को पुलिस ने मामले में पोक्सो एक्ट लगाते हुए सपा नेता और उसके नौकर को अयोध्या जिले के पुरा कलंदर इलाके से गिरफ्तार किया था। जाँच के बाद पुलिस ने 10 सितंबर को मामले में आरोप पत्र दाखिल किया।
पुलिस में दर्ज़ शिक़ायत के अनुसार, आरोपितों ने लड़की के साथ कई बार बलात्कार किया और इस कृत्य का वीडियो भी बनाया। मोइद ने दावा किया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है, जिसके बाद अदालत ने आरोपितों की डीएनए रिपोर्ट मांगी थी। सपा नेता ने अपनी ज़मानत याचिका में दावा किया कि वह एक बुजुर्ग व्यक्ति हैं और उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है। मोइद ने यह भी आरोप लगाया गया मामले में उन्हें किसी भी प्रकार के कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।





