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जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों के बीच मुठभेड़, आर्मी कैप्टन शहीद

सेना के मुताबिक, शहीद कैप्टन दीपक सिंह 48 राष्ट्रीय राइफल से हैं। वह डोडा में फॉरेस्ट एरिया में चल रहे एनकाउंटर में टीम को लीड कर रहे थे।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों के बीच मुठभेड़, आर्मी कैप्टन शहीद
फोटो: जम्मू-कश्मीर के डोडा में आतंकियों के बीच मुठभेड़, आर्मी कैप्टन शहीद
जम्मू-कश्मीर के डोडा में बुधवार को सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में आर्मी कैप्टन शहीद हो गये। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एनकाउंटर में 4 आतंकियों की भी मारे जाने की खबर है। इलाके में खूने के धब्बे मिले थे, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने अभियान चलाया। सुरक्षा बलों ने एम4 राइफल बरामद की है। इसके अलावा गोला-बारूद और रसद सामग्री भी बरामद की है। इसके साथ ही तीन बैग भी जब्त किए गए हैं।


कैप्टन दीपक सिंह शहीद

सेना के मुताबिक, शहीद कैप्टन दीपक सिंह 48 राष्ट्रीय राइफल से हैं। वह डोडा में फॉरेस्ट एरिया में चल रहे एनकाउंटर में टीम को लीड कर रहे थे। सेना के मुताबिक, एनकाउंटर अभी जारी है। आतंकी जंगल में एक नदी के पास छिपकर फायरिंग कर रहे हैं। सुबह वे फायरिंग के दौरान पीछे भाग गए थे। वहां से जवानों को अमेरिकी एम-4 राइफल और तीन बैग में विस्फोटक मिला है।

जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकी घटनाओं को लेकर दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मीटिंग बुलाई। इसमें एनएसए अजीत डोभाल, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल हुए। बैठक की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में यह 30 दिन में दूसरा हमला है। इससे पहले 15 जुलाई की रात 9 बजे डेसा फॉरेस्ट एरिया में आतंकियों के साथ आर्मी की मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में सेना के कैप्टन समेत 4 जवान शहीद हो गए थे। एक पुलिसकर्मी की भी मौत हुई है थी । इस एनकाउंटर की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश ने ली थी।

स्वतंत्रता दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट

स्वतंत्रता दिवस से पहले जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जम्मू में 3000 से अधिक सेना के जवान और बीएसएफ के 2000 जवान तैनात किए गए हैं। वहीं आतंकवाद से निपटने के लिए असम राइफल्स के करीब 1500-2000 जवान भी तैनात किए गए हैं।

इससे पहले कठुआ में पुलिस ने 12 अगस्त को 8 ओवरग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया था। जैश आतंकी मॉड्यूल के इन वर्कर्स ने 26 जून को डोडा में मारे गए 3 जैश के आतंकियों की मदद की थी। इन ओवर ग्राउंड वर्कर्स ने आतंकियों को बॉर्डर पार करने के बाद डोडा के जंगल और पहाड़ियों तक पहुंचाने में मदद की थी। उन्हें खाना भी मुहैया कराया था।

पुलिस ने बताया था कि इस आतंकी मॉड्यूल का सरगना मोहम्मद लतीफ था। वह कठुआ के अम्बे नाल इलाके में रहता था। जैश आतंकियों के हैंडलर्स से लतीफ ही मुख्य रूप से संपर्क करता था। लतीफ ही तय करता था कि नेटवर्क में किसे शामिल करना है और किसे नहीं।