आयोग संविधान के दायरे में रहकर काम करता है
मंगलवार को चुनाव आयोग ने पहली आचार संहिता के तहत की गयी कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। आयोग ने कहा कि वह केंद्रीय एजेंसियों जैसे - सीबीआई, ईडी और एनआईए के ख़िलाफ दर्ज़ विपक्ष की याचिकाओं पर कार्रवाई नहीं करेगा, आयोग ने यह फ़ैसला सर्वसम्मति से लिया है। आयोग ने कहा कि वह केंद्रीय एजेंसियों पर कार्रवाई कर क़ानूनी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करना चाहता है।
आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत काम करता है, आयोग अपनी कार्रवाई के दौरान क़ानूनी जाँच और अदालतों के आदेशों को ध्यान में रखकर ही कार्रवाई करता है। आयोग इसके लिए भी प्रतिबद्ध है कि सभी राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों को समान अवसर प्राप्त हो, लेकिन आयोग ने इस दौरान उन घटनाओं पर भी नज़र रखी जो क़ानून के दायरे में नहीं थी, जिसके आधार पर आयोग ने कार्रवाई कर फ़ैसले भी लिये हैं।
केंद्रीय एजेंसियों के दुरूपयोग पर विपक्ष ने की थी शिक़ायत
चुनाव अभियानों के दौरान जब आचार संहिता लागू थी, उस वक़्त विपक्ष ने समय- समय पर संहिता के उल्लंघन को लेकर आयोग से संपर्क किया था। विपक्ष ने आयोग से माँग की थी कि चुनाव के समय विपक्ष के नेताओं पर होने वाली कार्यवाहियों पर रोक लगा देनी चाहिये। आयोग ने इस माँग को मानने से इनकार कर दिया। आयोग ने कहा कि उसके पास केंद्रीय एजेंसियों की जाँच को रोकने के लिए पर्याप्त अधिकार नहीं है, जब तक कि कार्रवाई निराधार ना हो।
आयोग ने कहा कि जिन लोगों पर केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जाँच की जा रही है, वो चाहें तो अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, जैसा कि कथित शराब घोटाले मामले में दिल्ली सरकार ने पहले से ही अदालत का विकल्प चुन रखा है।
कुछ मामलों में आयोग ने ख़ुद संज्ञान लिया हुआ है - चुनाव आयोग
आयोग ने कहा कि वह चुनावों के शुरुआत में ही निष्पक्षता के आधार पर कुछ निर्णय ले चुका है, जिसके तहत दोहरे प्रभाव वाले प्रमुख सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों और मुख्यमंत्रियों के प्रधान सचिव को हटा चुका है।आयोग के एक पदाधिकारी ने कहा कि जिन छह राज्यों में आयोग ने ख़ुद संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की हैं, उनमें से चार भाजपा शासित राज्य हैं। इसके अलावा आयोग उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर चुका है जिसमें अधिकारियों और चुनाव उम्मीदवारों के बीच संबंध पाये गये हैं।
आयोग ने चुनावों के दौरान महिलाओं की गरिमा के ख़िलाफ की गयी टिप्पणियों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रिया श्रीनेत और दिलीप घोष को सावधान किया था। गरिमा के ख़िलाफ टिप्पणी को लेकर आयोग ने कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला के चुनाव प्रचार पर 48 घंटों के लिए रोक लगा दी थी।
आयोग ने पेश किये शिकायतों के कुल आँकड़े
आयोग ने बताया कि उसने विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से प्राप्त 200 बीजेपी शिकायतों को दर्ज किया, जिनमें से 169 मामलों में कार्रवाई की गयी। भाजपा की कुल 51 शिक़ायतों में से 38 शिक़ायतों पर कार्रवाई की गयी। कांग्रेस की 59 शिक़ायतों में से 51 शिक़ायतों पर कार्रवाई की गयी। जबकि अन्य दलों की 90 शिक़ायतों में से 80 पर कार्रवाई की गयी है।
आयोग ने कहा कि नागरिकों के लिए बने सी-विजिल प्लेटफॉर्म पर कुल 2,68,080 शिक़ायतें आयी थी, जिसमें से 2,67,762 शिक़ायतों का निवारण किया जा चुका है, इनमें से 92 प्रतिशत शिक़ायतों का निवारण लगभग 100 मिनट के अंदर कर दिया गया है।





