अदालत की समीक्षा और निर्देश
जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ 2017 की एक स्वत: संज्ञान याचिका की समीक्षा की। इसके तहत डॉ. सरीन समिति की रिपोर्ट को लागू करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश दिए गए। रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को उन्नत और सुव्यवस्थित करना है।
दिल्ली सरकार ने अब तक इस योजना को लागू करने से परहेज किया है। हालांकि, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक ने 10 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट में कहा कि PM-ABHIM योजना केवल इंदिरा गांधी अस्पताल में एक डायग्नोस्टिक लैब के लिए लागू की जा रही है। 12 दिसंबर को हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अधिकारी इस योजना को लागू करने पर केंद्रित बैठक करें।
अदालत ने कहा,
“PM-ABHIM योजना का पूरी तरह से लागू होना बेहद ज़रूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दिल्ली के नागरिक केंद्र की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं और धन से वंचित न रह जाएं। योजना की धनराशि को अन्य परियोजनाओं में हस्तांतरित करना उचित नहीं है, जैसा कि वर्तमान में दावा किया जा रहा है।”
कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस योजना को पहले ही लागू कर चुके हैं, और दिल्ली में इसे लागू न करना अनुचित है।
इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि आदर्श आचार संहिता की परवाह किए बिना, इस MoU पर हस्ताक्षर किए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि यह कदम अदालत की निगरानी में हो रहा है और इसका उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को लाभ पहुंचाना है। अदालत ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि MoU को 13 जनवरी को अगली सुनवाई के दौरान पेश किया जाए।
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