मुस्लिम बहुल इलाकों में बिखरे वोट
इस बार मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं के वोट विभिन्न दलों में बंटते हुए देखे गए। मुस्तफाबाद और ओखला सीट पर मुस्लिम वोट AIMIM और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच बंट गए। इस विभाजन ने AAP और कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा की हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के वोट परंपरागत रूप से इन पार्टियों को मिलते थे। दिल्ली के मुस्लिम समुदाय के बीच आम आदमी पार्टी के प्रति नाराजगी साफ नजर आई। COVID-19 के दौरान तब्लीगी जमात से जुड़े विवाद और दिल्ली दंगों पर केजरीवाल सरकार का रुख मुस्लिम मतदाताओं को खटका। इन मुद्दों ने मुस्लिम मतदाताओं को कांग्रेस और AIMIM के पक्ष में वोट देने के लिए प्रेरित किया, जिससे AAP को नुकसान हुआ।
मुसलमानों के वोट बिखरने का फायदा बीजेपी को होता दिख रहा है, क्योंकि मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू वोटर्स एकजुट होकर बीजेपी के पक्ष में दिखे। इससे बीजेपी के लिए मुश्किल सीटों पर भी जीत की संभावना बढ़ गई। इस चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने अपनी वोटिंग च्वॉइसेस को लेकर अधिक मुखर रुख अपनाया। पहले से एकजुट वोट बैंक के रूप में पहचान रखने वाले मुस्लिम मतदाता इस बार विभाजित नजर आए, और इसका सीधा असर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की चुनावी रणनीतियों पर पड़ा।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता इस बार केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से नाराज थे, जिसका असर साफ नजर आया। हालांकि, दंगा प्रभावित इलाकों में उच्च मतदान दर से यह संकेत भी मिला कि वहां के लोग लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने में पीछे नहीं हटे।
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