विधेयक पर मुस्लिम संगठनों की आपत्ति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार जल्द ही इस विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि इस कानून के लागू होने से वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा, जिससे समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता प्रभावित होगी। विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा,
"1995 का वक्फ कानून अपने आप में एक संपूर्ण कानून था। अगर इसमें कोई खामियां थीं, तो सरकार को उनमें सुधार करना चाहिए था, लेकिन इसे पूरी तरह बदलकर बर्बाद किया जा रहा है।"
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं, लेकिन अब उनकी तहजीबी पहचान (सांस्कृतिक पहचान) पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड में लागू किए जा रहे समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र करते हुए कहा कि यह भी इसी सोच का हिस्सा है।
"सरकार को हमारी भावनाओं को समझना चाहिए। हमारी अवाम अपने मसले खुद सुलझा सकती है, किसी बाहरी दखल की जरूरत नहीं है।"
बीजेपी का पलटवार- "AIMPLB कांग्रेस की बी टीम"
इस विरोध प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने AIMPLB पर कांग्रेस के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा,
"ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह साबित कर दिया है कि वह कांग्रेस की बी टीम है और भारत की एकता व अखंडता के लिए खतरा बन चुका है।"
उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक किसानों, गरीब मुसलमानों और दलितों के अधिकारों की रक्षा के लिए लाया गया है और इसका उद्देश्य बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को सशक्त करना है। सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सड़क पर धरना देना असंवैधानिक है और कानून को ऐसे किसी भी विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
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