दिल्ली में इस समय एमसीडी की कोई स्थायी समिति नहीं है, क्योंकि आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच इस पर सहमति नहीं बन पाई है। इसी वजह से एमसीडी कमिश्नर को यह बजट खुद पेश करना पड़ा। शिक्षा के क्षेत्र में भी खासा ध्यान दिया गया है। इस बार एमसीडी ने शिक्षा के लिए 1,693 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जो पिछले साल के 1,609 करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है। एमसीडी के अधीन इस समय 1,531 प्राथमिक विद्यालय, 43 अनुदान प्राप्त स्कूल और 809 अन्य स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा, राजधानी में खेल को बढ़ावा देने के लिए तीन करोड़ रुपये स्टेडियम और खेल मैदानों के निर्माण पर खर्च किए जाएंगे।
हेल्थ सेक्टर की बात करें तो इसमें भी विशेष ध्यान दिया गया है, हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार के बजट में कुछ कटौती देखने को मिली है। इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 1,833 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि पिछले साल यह राशि 2,061 करोड़ रुपये थी। हालांकि, साफ-सफाई को प्राथमिकता देते हुए इस बार सैनिटेशन बजट को बढ़ाकर 4,907 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो कि पिछले साल 4,593 करोड़ रुपये था।
इस बजट में कचरा प्रबंधन को लेकर भी कई अहम कदम उठाए गए हैं। नरेला-बवाना में 3,600 टन कचरे को ऊर्जा में बदलने के लिए एक प्लांट शुरू किया जाएगा, जबकि गाजीपुर में 3,000 टन कचरे को प्रोसेस करने वाला एक और प्लांट स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा, नगली सक्रावति और गोयला डेयरी में बायो-मीथेनाइजेशन प्लांट तैयार करने के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
दिलचस्प बात यह है कि जिन क्षेत्रों को इस बार के बजट में प्राथमिकता दी गई है, उन्हीं क्षेत्रों में पिछली बार अपेक्षाकृत कम काम हुआ था। यही कारण रहा कि आम आदमी पार्टी को चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। अब देखना होगा कि एमसीडी इस बजट का सही तरीके से इस्तेमाल कर पाती है या नहीं, और क्या इससे दिल्ली की जनता को वह सुविधाएं मिलेंगी जिनका वादा किया गया है।
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