पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि CBI इस मामले में पूरी तरह से गंभीरता नहीं दिखा रही है और अपराध के हर पहलू की ठीक से जांच नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा, "डीएनए रिपोर्ट में चार लड़कों और एक लड़की का डीएनए पाया गया है, जिसका मतलब है कि इस अपराध में अन्य लोग भी शामिल थे। हम चाहते हैं कि इन सभी आरोपियों को पकड़कर सजा दी जाए, क्योंकि अगर इन सबकी पहचान हो चुकी है तो किसी भी आरोपी को बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए।" उनके मुताबिक, मामले में और भी लोग शामिल थे, और उन्हें उम्मीद है कि वे भी जल्द गिरफ्तार किए जाएंगे।
कोलकाता पुलिस के वालंटियर संजय रॉय पर इस घिनौने अपराध का आरोप है, जिसे पिछले साल 9 अगस्त को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने संजय रॉय को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था, जबकि एक दिन पहले ही डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार रूम से बरामद किया गया था। इस घटना के बाद मामले को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने CBI के पास सौंप दिया था, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। इस मामले में 12 नवंबर को बंद कमरे में सुनवाई शुरू की गई थी, और अब 57 दिन बाद सियालदह अदालत के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास इस मामले पर अपना फैसला सुनाएंगे।
लेडी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में संजय रॉय के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई 9 जनवरी को पूरी हुई थी, जिसमें 50 गवाहों से पूछताछ की गई थी।
पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि इस मामले में और भी लोग शामिल थे, जिनकी भूमिका अभी तक सामने नहीं आ पाई है। उनका कहना है कि इन आरोपियों को गिरफ्तार कर उन पर भी मुकदमा चलाया जाए। साथ ही, उन्होंने अदालत से मामले की और गहरी और व्यापक जांच की मांग की है, ताकि हर दोषी को सजा मिल सके और इस तरह के अपराधों के खिलाफ एक कड़ा संदेश दिया जा सके।
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