कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. मुकेश नायक ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने लक्ष्मण सिंह की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी है। उन्होंने कहा, "यह स्पष्ट संदेश है कि कांग्रेस में अनुशासन सभी पर समान रूप से लागू होता है। लक्ष्मण सिंह पहले भी कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं, जिनसे पार्टी को असहज स्थिति में आना पड़ा।"
डॉ. नायक ने उदाहरण देते हुए कहा कि लक्ष्मण सिंह का हालिया बयान - जिसमें उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी को आतंकवादियों के साथ खड़ा बताया था, अस्वीकार्य है और इसे लेकर पार्टी ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई।
24 अप्रैल को लक्ष्मण सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, रॉबर्ट वाड्रा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने उमर अब्दुल्ला पर आतंकवादियों से मिले होने का आरोप लगाया था और कहा था कि पार्टी नेताओं को सोच-समझकर बयान देने चाहिए, अन्यथा इसका चुनावों में खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा था, “अगर पार्टी को मुझे निकालना है तो आज ही निकाल दे। रॉबर्ट वाड्रा और राहुल गांधी की बचकानी बातें हम कब तक झेलेंगे?”
9 मई को कांग्रेस पार्टी ने लक्ष्मण सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें 10 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था। पार्टी को मिला जवाब असंतोषजनक पाया गया, जिसके बाद उनकी निलंबन की सिफारिश की गई। अंततः आलाकमान की मंजूरी के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। डॉ. नायक ने कहा, “कांग्रेस पार्टी भाजपा की तरह नहीं है, जहां मंत्री विवादास्पद बयानों के बाद भी पदों पर बने रहते हैं। कांग्रेस में अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” उन्होंने यह भी तंज कसते हुए कहा कि लक्ष्मण सिंह शायद अब सुरेश पचौरी की तरह भाजपा में शामिल हो जाएं।





