न्यूज़ एजेंसी IANS से बातचीत में आरिफ मसूद ने कहा,
“मैंने सातों प्रतिनिधियों शशि थरूर, सुप्रिया सुले, संजय झा, असदुद्दीन ओवैसी सहित से यह सीधा सवाल पूछा है कि जब आप विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए आतंकवाद के खिलाफ हमारे स्टैंड को पेश करेंगे, तब अगर कोई अंतरराष्ट्रीय पत्रकार यह पूछ लेता है कि आपकी ही सरकार के मंत्री ने एक सेना अधिकारी पर आपत्तिजनक बयान दिया, तो आपका जवाब क्या होगा?"
उन्होंने कहा कि यह सवाल केवल राजनीतिक नहीं बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय साख से जुड़ा हुआ है।
“अगर आपने ऐसे सवालों का जवाब तैयार नहीं किया, तो हो सकता है कि भारत की छवि को नुकसान पहुंचे और हमारी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगे।”
आरिफ मसूद ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल केंद्र सरकार द्वारा प्रतिनिधिमंडल के चयन पर नहीं है।
“यह सरकार का विशेषाधिकार है कि वो किन सांसदों को भेजती है, लेकिन जो लोग जा रहे हैं, उन्हें तैयार होकर जाना चाहिए। उन्हें केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब लेना चाहिए कि अगर इस मुद्दे पर सवाल उठते हैं, तो वे क्या उत्तर देंगे।”
उन्होंने कहा कि भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मंत्री विजय शाह के बयान को लेकर कोई भ्रम न रहे, ताकि मिशन की सफलता और भारत की साख दोनों सुरक्षित रह सकें।





