डॉ. मेराजुद्दीन अहमद एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। उनका स्थायी निवास मेरठ के कोतवाली क्षेत्र में स्थित बनी सराय था, जबकि उनका जन्म बागपत जिले के रटौल गांव में हुआ था। वह कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में कई वर्षों तक सक्रिय रहे, और पार्टी की नीतियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1998 में कांग्रेस से की थी, लेकिन बाद में उन्होंने सपा में शामिल होकर बागपत संसदीय सीट से 1998 और 1999 में चुनाव लड़ा।
हालांकि, बाद में वह 2010 में फिर से कांग्रेस में लौट आए थे। 2017 में रालोद में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी कार्य किया और राजनीति में अपनी उपस्थिति मजबूत बनाई। 2024 के यूपी उपचुनाव से पहले रालोद का साथ छोड़कर उन्होंने कांग्रेस में वापसी की थी।
डॉ. अहमद ने हमेशा अपने कार्यों से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी को सशक्त किया। उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा, और उनकी नीतियों और सिद्धांतों को उनकी मृत्यु के बाद भी याद किया जाएगा। उनकी राजनीतिक यात्रा उनके राजनीतिक दृष्टिकोण, नेतृत्व और जनता के प्रति प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उनके निधन से न केवल कांग्रेस पार्टी को बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य को एक बड़ा झटका लगा है।
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