सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पार्थ चटर्जी को 1 फरवरी, 2025 तक रिहा किया जाए। हालांकि, यदि आरोप तय करने और गवाहों की जांच इससे पहले पूरी हो जाती है, तो उन्हें तत्काल रिहा कर दिया जाएगा। उन्हें विधायक के अलावा किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। पिछली सुनवाई में उनके वकील मुकुल रोहतगी ने बताया था कि वे पिछले 26 महीनों से जेल में हैं और उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि रिहाई के बाद चटर्जी को कोई सार्वजनिक पद नहीं दिया जाएगा, लेकिन मुकदमे के दौरान वे विधायक बने रह सकते हैं। ये प्रतिबंध केवल ईडी के मामले तक सीमित हैं। याचिकाकर्ता ने गवाहों के बयान दर्ज कराने में ट्रायल कोर्ट से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोप तय करने के फैसले को चुनौती देने के अधिकार के बिना गवाहों से पूछताछ की जाएगी।
गिरफ्तारी के बाद TMC ने सभी पदों से हटाया था
ईडी मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है, लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को 31 दिसंबर, 2024 या शीतकालीन अवकाश से पहले आरोप तय करने का निर्देश दिया है। चटर्जी को पश्चिम बंगाल सरकार के सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक और कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के लिए गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद ममता बनर्जी सरकार ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया, और टीएमसी ने महासचिव समेत सभी पार्टी पदों से निकाल दिया।





