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Bomb Threats: राष्ट्रीय राजधानी में फिर बम की दहशत, एक साथ 20 स्कूलों को मिली धमकी

दिल्ली में एक बार फिर बम की धमकियों ने अफरा-तफरी मचा दी है। गुरुवार, 18 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी के 20 स्कूलों को एक साथ बम से उड़ाने (Bomb Threats) की धमकी मिली।

Bomb Threats: राष्ट्रीय राजधानी में फिर बम की दहशत, एक साथ 20 स्कूलों को मिली धमकी
फोटो: Bomb Threats: राष्ट्रीय राजधानी में फिर बम की दहशत, एक साथ 20 स्कूलों को मिली धमकी
दिल्ली में एक बार फिर बम की धमकियों ने अफरा-तफरी मचा दी है। गुरुवार, 18 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी के 20 स्कूलों को एक साथ बम से उड़ाने (Bomb Threats) की धमकी मिली, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। सबसे पहले रोहिणी सेक्टर-3 स्थित अभिनव पब्लिक स्कूल, फिर पश्चिम विहार का रिचमोंड ग्लोबल स्कूल और इसके बाद रोहिणी सेक्टर-24 के सोवरन स्कूल को धमकी भरे ईमेल मिले। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ते और दमकल विभाग की टीमें संबंधित स्कूल परिसरों में पहुंच गईं। सभी जगहों पर तलाशी अभियान जारी है, हालांकि अब तक किसी संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई है।

लगातार तीसरे दिन मिली Bomb Threats

यह धमकियां ऐसे समय पर आई हैं जब बीते दो दिनों में भी दिल्ली के स्कूलों को इसी तरह की ईमेल धमकियां मिल चुकी हैं। बुधवार को दक्षिणी दिल्ली के वसंत कुंज स्थित वसंत वैली स्कूल और द्वारका के सेंट थॉमस स्कूल को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। पिछले तीन दिनों में कुल नौ स्कूलों को दस से अधिक धमकी भरे ईमेल मिल चुके हैं, जिससे दिल्ली का शैक्षणिक वातावरण तनाव में है।

उल्लेखनीय है कि इसी साल 7 फरवरी को भी पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेस-1 स्थित अल्कॉन पब्लिक स्कूल को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। हालांकि जांच में कोई विस्फोटक नहीं मिला था और पुलिस ने इसे महज अफवाह करार दिया था।

जांच में उलझी पुलिस, डार्क वेब बना चुनौती

बम की इन धमकियों ने पुलिस और साइबर एजेंसियों को गंभीर चुनौती में डाल दिया है। जांच में पता चला है कि अधिकतर ईमेल 'एन्क्रिप्टेड नेटवर्क' और 'वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क' (VPN) के जरिए भेजे जा रहे हैं। इससे उनके स्रोत का पता लगाना बेहद मुश्किल हो रहा है। वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि धमकी देने वाले अपराधी ‘डार्क वेब’ का इस्तेमाल कर रहे हैं — इंटरनेट का वह हिस्सा जो पारंपरिक सर्च इंजनों से नजर नहीं आता और विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए ही पहुंचा जा सकता है। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, “डार्क वेब का पता लगाना, शीशों से भरे कमरे में परछाईं का पीछा करने जैसा है। जैसे ही कोई सुराग नजर आता है, वह एक और गुमनाम परत के पीछे छिप जाता है।”