खट्टर ने कांग्रेस की गुटबाजी पर निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और गांधी परिवार को उनका अपमान करने के बाद भी शर्म नहीं आई है। उन्होंने दलित समुदाय की तरफ इशारा करते हुए कहा कि एक बड़ा वर्ग सोच रहा है कि क्या करें। हमने कई नेताओं को अपने साथ मिलाया है और हम तैयार हैं उन्हें भी अपने साथ लाने के लिए। खट्टर का यह बयान तब आया है जब कुमारी शैलजा पिछले हफ्ते से पार्टी के प्रचार से दूर हैं। वे अपने घर पर समर्थकों से मिल रही हैं, लेकिन क्षेत्र में सक्रिय नहीं दिख रही हैं। शैलजा का प्रभाव दलित वोटरों पर है। उनका एक इशारा कांग्रेस के लिए हरियाणा में दिक्कतें पैदा कर सकता है।
अन्य पार्टी तलाश रही मौका
शैलजा की नाराजगी का भाजपा मौका उठाने से पीछे नहीं हट रही। भाजपा की पूरी कोशिश कांग्रेस को मिल रहे फायदों को अपनी तरफ मोड़ना है। भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि जब कांग्रेस अपनी दलित नेता कुमारी शैलजा का सम्मान नहीं कर पाई, तो वे प्रदेश के बाकी दलितों का क्या करेगी।
कुछ दिन पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने भी शैलजा के बहाने कांग्रेस को घेरा था, जिसके बाद ये मुद्दा गरमा गया था। आकाश आनंद ने कहा था कि आपने देखा होगा कि हुड्डा के समर्थकों ने शैलजा के बारे में कितनी बुरी बातें कही है। वह एक बड़ी दलित नेता हैं और हम उनका सम्मान करते हैं। आकाश आनंद ने कुमारी शैलजा का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस दलितों को कभी सम्मान नहीं देगी और वह हमेशा दलित विरोधी रहेगी।
कुमारी शैलजा का राजनीतिक सफर
शैलजा ने 1990 में महिला कांग्रेस की अध्यक्ष बन कर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। 1991 में हरियाणा के सिरसा से पहली बार 10वीं लोकसभा के लिए चुनी गई। नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार में केंद्रीय शिक्षा और संस्कृति राज्य मंत्री बनी। 1996 में हरियाणा में कांग्रेस की हार के बाद भी 11वीं लोकसभा के लिए चुनी गईं। 2004 में लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सक्रिय रही। 2005 में कॉमनवेल्थ लोकल गवर्नमेंट फोरम के बोर्ड के सदस्य के रूप में चुना गया। 2014 में हरियाणा से राज्यसभा के लिए चुनी गईं, 2019 में अंबाला से चुनाव हार गईं। लेकिन 2024 के चुनाव में सिरसा से जीत दर्ज की।





