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दिल्ली में बीजेपी ने दलबदलुओं पर लगाया दांव, जानें किन-किन को मिली सफलता

इस चुनाव में बीजेपी ने कई दलबदलू नेताओं को मौका दिया, जिनमें से कुछ ने पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए जीत हासिल की, जबकि कुछ को जनता ने नकार दिया।

दिल्ली में बीजेपी ने दलबदलुओं पर लगाया दांव, जानें किन-किन को मिली सफलता
फोटो: Delhi Assembly Election, AAP
दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं, और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 48 सीटों पर कब्जा जमाया है। आम आदमी पार्टी (AAP) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा और वह महज 22 सीटों पर सिमट गई। अब जल्द ही बीजेपी अपने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेगी। इस चुनाव में कुछ ऐसे नेता भी थे, जिन्होंने हाल ही में अपनी पार्टियां छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। इनमें से कुछ को पार्टी ने टिकट दिया और वे विजयी रहे, जबकि कुछ को हार का सामना करना पड़ा।

करतार सिंह तंवर, जो 2020 में आम आदमी पार्टी से विधायक चुने गए थे, ने जुलाई 2024 में पार्टी छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। बीजेपी ने उन्हें छतरपुर सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की।  इसी तरह, आम आदमी पार्टी सरकार में परिवहन मंत्री रहे कैलाश गहलोत भी चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए। पहले वे नजफगढ़ से विधायक थे, लेकिन इस बार बीजेपी ने उन्हें बिजवासन से टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। अरविंदर सिंह लवली, जो पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, ने भी इस चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थामा। पार्टी ने गांधीनगर सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की। 

इन्हें मिली हार


वहीं, बदरपुर सीट से बीजेपी ने आम आदमी पार्टी से आए एनडी शर्मा को टिकट दिया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। AAP सरकार में मंत्री रहे राजकुमार आनंद ने अप्रैल 2024 में पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। पहले उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का रुख किया, लेकिन चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी ने उन्हें पटेल नगर से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह यह चुनाव जीतने में असफल रहे।

प्रियंका गौतम, जो आम आदमी पार्टी में पार्षद रह चुकी थीं, ने भी चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थामा। उन्हें कुंडली विधानसभा सीट से टिकट दिया गया, लेकिन वह आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार से हार गईं। इस चुनाव में बीजेपी ने कई दलबदलू नेताओं को मौका दिया, जिनमें से कुछ ने पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए जीत हासिल की, जबकि कुछ को जनता ने नकार दिया। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि बीजेपी दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री किसे बनाएगी।

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