इसके साथ ही कैबिनेट ने 'मुख्यमंत्री बिहार गुरु-शिष्य परंपरा योजना' को भी मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य राज्य की विलुप्त और दुर्लभ कलाओं का संरक्षण करना है। इसके अंतर्गत युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए अनुभवी गुरुओं की सहायता से पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित किया जाएगा। इस योजना के क्रियान्वयन पर प्रत्येक वर्ष ₹1 करोड़ 11 लाख 60 हजार की राशि खर्च की जाएगी।
बैठक में ‘मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना’ को भी स्वीकृति मिली, जिसका उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के बाद इंटर्नशिप सहायता प्रदान करना है। इसके तहत 12वीं पास और कौशल विकास प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को ₹4000, आईटीआई एवं डिप्लोमा धारकों को ₹5000 और स्नातकोत्तर डिग्रीधारियों को ₹6000 प्रति माह की इंटर्नशिप राशि दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, अपने गृह जिले से बाहर इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को ₹2000 तथा राज्य से बाहर इंटर्नशिप करने वाले युवाओं को अतिरिक्त ₹5000 प्रति माह सहायता दी जाएगी।
इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 5000 युवाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 2026 से 2031 के बीच एक लाख युवाओं को इस योजना का लाभ देने की योजना है।
नीतीश सरकार के ये निर्णय राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
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