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दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा को बड़ा झटका, राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिवीजन पिटीशन को किया खारिज

दिल्ली सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कपिल मिश्रा को अदालत से एक बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनकी रिवीजन याचिका को खारिज |

दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा को बड़ा झटका, राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिवीजन पिटीशन को किया खारिज
फोटो: Kapil Mishra
दिल्ली सरकार के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कपिल मिश्रा को अदालत से एक बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनकी रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है। कपिल मिश्रा, जो दिल्ली में भाजपा सरकार के कानून मंत्री हैं, ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें समन जारी किया गया था। यह मामला 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कथित तौर पर आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में कपिल मिश्रा को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मॉडल टाउन सीट से उम्मीदवार बनाया था। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में वह करावल नगर सीट से जीतकर विधायक बने हैं। 

27 साल बाद दिल्ली में बनी भाजपा सरकार में उन्हें कानून मंत्री का पद दिया गया है। कपिल मिश्रा इससे पहले 2015 में अरविंद केजरीवाल सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, बाद में उनका आम आदमी पार्टी (AAP) से मतभेद हो गया और वह भाजपा में शामिल हो गए। कपिल मिश्रा को यह झटका ऐसे समय में लगा है, जब 2020 में हुए दिल्ली दंगों को लेकर भी उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की गई है। दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका का विरोध किया है। पुलिस ने लिखित जवाब में कहा कि मिश्रा को इस मामले में 'फंसाया' जा रहा है, क्योंकि उत्तरपूर्वी दिल्ली दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। अदालत ने इस मामले पर फैसला अभी सुरक्षित रखा है। यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास ने कपिल मिश्रा, दयालपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी, भाजपा विधायक मोहन सिंह बिष्ट, पूर्व भाजपा विधायक जगदीश प्रधान और सतपाल सहित पांच अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। 

इस मामले में अदालत का फैसला अभी बाकी है। कपिल मिश्रा के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि एक तरफ उन्हें अदालत से झटका लगा है, तो दूसरी ओर दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। इस पूरे मामले ने उनकी राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों को बढ़ा दिया है। दिल्ली दंगों के मामले में कपिल मिश्रा की भूमिका को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। कुछ लोगों का आरोप है कि उनके भड़काऊ भाषणों ने दंगों को हवा दी थी, जबकि मिश्रा और उनके समर्थक इन आरोपों को खारिज करते हैं। दिल्ली पुलिस ने भी अपने जवाब में कहा है कि मिश्रा को इस मामले में बेवजह फंसाया जा रहा है। 

 इस बीच, कपिल मिश्रा की राजनीतिक स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वह भाजपा में शामिल होने के बाद से पार्टी के एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे हैं और उन्हें दिल्ली सरकार में कानून मंत्री का महत्वपूर्ण पद दिया गया है। हालांकि, उनके खिलाफ लगातार विवाद और कानूनी चुनौतियां उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित कर रही हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कपिल मिश्रा इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और भविष्य में उनकी राजनीतिक यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ती है। इस मामले में अदालत के आगे के फैसले और दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उनकी भूमिका की जांच के नतीजे उनके राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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