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अनुप्रिया पटेल ने आशीष पटेल को साजिशों से बचाने का किया दावा, बोलीं- सख्ती से मिलेगा जवाब

समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक पल्लवी पटेल द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल भी खुलकर सामने आ गई हैं। गुरुवार को लखनऊ |

अनुप्रिया पटेल ने आशीष पटेल को साजिशों से बचाने का किया दावा, बोलीं- सख्ती से मिलेगा जवाब
फोटो: Anupriya Patel, Ashish Patel,
योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के खिलाफ उनकी बहन और समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक पल्लवी पटेल द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब मोदी सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल भी खुलकर सामने आ गई हैं। गुरुवार को लखनऊ में अपनी पार्टी, अपना दल (एस) की विशेष बैठक में अनुप्रिया ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी प्रकार की साजिश या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी और उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को किसी भी प्रकार के षड्यंत्रों से डर नहीं है और संगठन की ताकत से वह इसका मुकाबला करेंगी। 

 अनुप्रिया ने पल्लवी पटेल द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी की पूरी कार्यकर्ता टीम जानती है कि इस साजिश के पीछे कौन है और किसके इशारे पर यह हो रहा है। उनका कहना था कि जब भी उनका दल पिछड़ों और दलितों के हक में आवाज उठाता है, तो कुछ लोग घबराते हैं और षड्यंत्र रचने लगते हैं। अनुप्रिया ने इस बात पर जोर दिया कि उनका दल सामाजिक न्याय की लड़ाई को और भी मजबूती से लड़ेगा और इस मार्ग में कोई भी रुकावट डालने की कोशिश करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इसके साथ ही अनुप्रिया पटेल ने आशीष पटेल के आरोपों का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा कि पल्लवी पटेल बीजेपी जॉइन करने के लिए रास्ता बना रही हैं। 

आशीष ने यह भी कहा कि पल्लवी के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं, जो सिर्फ सत्ता तक पहुंचने के लिए लगाए जा रहे हैं। उनका कहना था कि अगर पल्लवी भाजपा में शामिल होने का निर्णय लेती हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा, क्योंकि उनका खुद का आरोप है कि एक अन्य पार्टी ने उन्हें धोखा दिया है। वहीं, पल्लवी पटेल ने आशीष पटेल के प्रौद्योगिकी शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि विभागाध्यक्ष के पद पर लेक्चरर को 25-25 लाख रुपये लेकर प्रमोशन दिया गया है, जो आरक्षण के मानकों का उल्लंघन है। आशीष पटेल ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि प्रमोशन के लिए जो डीपीसी (डीपीसी प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी) ने निर्णय लिया, वह पूरी तरह से सही था। 

अगर किसी को इस प्रक्रिया में कोई खामी लगती है, तो सूचना विभाग इसकी जांच करा सकता है और सीबीआई से भी इसकी जांच करवाई जा सकती है। आशीष ने यह भी कहा कि अगर डीपीसी सही तरीके से काम किया है, तो इन आरोपों को लगाना बंद कर देना चाहिए। यह घटना यूपी की राजनीति में एक नया मोड़ ला रही है, जहां परिवार के भीतर के विवाद और आरोपों का मुद्दा न केवल व्यक्तिगत बल्कि पार्टी के भीतर भी उठ रहा है। भाजपा और अपना दल (एस) के बीच हो रही इस जुबानी जंग में यह साफ हो गया है कि आरोपों और साजिशों का जवाब दोनों ही दल पूरी ताकत से देने के लिए तैयार हैं।

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