अन्नामलाई ने अपने रुख को लेकर यह भी कहा कि वह हमेशा अपने विचारों के बारे में खुलकर बोलते रहे हैं, और इस बात से कभी पीछे नहीं हटते। उन्होंने उदाहरण दिया कि जब उन्होंने दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व से बात की थी, तो उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के कैडर के रूप में काम करने के लिए तैयार हैं, और यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह अपने शब्दों से पलायन नहीं करेंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि जब उन्होंने पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी, तब उनका रुख काफी आक्रामक था, लेकिन अब उन्होंने उसे नरम कर दिया है और यह कहा है कि राज्य के हितों के लिए हर संभव समझौता किया जा सकता है।
बीजेपी और AIADMK के सूत्रों ने बताया कि बीजेपी अब AIADMK को एनडीए में वापस लाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। इसके लिए बीजेपी को राज्य के कुछ प्रमुख नेताओं के साथ समझौता करना पड़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी अब किसी नेता को बलि चढ़ाकर भी इस गठबंधन को मजबूत करने के लिए तैयार है। इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम भूमिका निभाने वाले नेता केए सेंगोट्टैयन रहे हैं, जिनका हाल ही में दिल्ली दौरा हुआ था।
सेंगोट्टैयन 2017 में जयललिता की मौत के बाद मुख्यमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार थे, लेकिन अब वे पार्टी के भीतर कुछ फैसलों से असंतुष्ट हैं, खासकर इरोड में पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर, जिसके कारण वे पार्टी के कई कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि सेनगोट्टैयन ने दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी, और इसके बाद ईपीएस ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। कहा जा रहा है कि सेनगोट्टैयन को शशिकला का आशीर्वाद प्राप्त है, और बीजेपी उन्हें अपने बैकअप विकल्प के रूप में देख रही है। इस स्थिति का बीजेपी द्वारा संभावित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है, यदि एनडीए में AIADMK का पुनः समावेश किया जाता है।
यह घटना 2023 में तब शुरू हुई जब अन्नामलाई के सीएन अन्नादुरई और जयललिता पर दिए गए बयानों के बाद AIADMK ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। हालांकि, आगामी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले, बीजेपी और AIADMK फिर से गठबंधन कर सकते हैं, ताकि चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत कर सकें। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, जिसका फायदा डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन को हुआ था। स्टालिन की पार्टी और उनके सहयोगियों ने राज्य की सभी 39 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी, और इसने यह स्पष्ट कर दिया कि तमिलनाडु में बीजेपी और AIADMK के गठबंधन की जरूरत महसूस हो सकती है।
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