पुलिस के अनुसार, आरोपी ज्ञानशेखरन की उम्र 37 वर्ष है और वह पहले से ही कम से कम 10 आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा है। उसने पीड़िता को धमकी दी थी कि उसे जब भी वह उसे बुलाए, वह मिलकर ही रहेगा। आरोप यह भी है कि उसने अपनी आपराधिक गतिविधियों के कारण पीड़िता को भयभीत कर रखा था। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया और घटना की कड़ी निंदा की। आयोग ने तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शंकर जीवाल को एक पत्र लिखकर कहा कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 71 लागू की जाए, जो बार-बार अपराध करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से संबंधित है। आयोग ने यह भी कहा कि आरोपी आदतन अपराधी है और उसने पहले भी इस प्रकार के अपराध किए हैं। इसके अलावा, आयोग ने यह आरोप भी लगाया कि आरोपी के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है और उन्हें दबाया जा रहा है।
यह मामला राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी मोर्चे पर एक गंभीर मुद्दा बन चुका है, क्योंकि इसे लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ पुलिस की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। विरोध प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है, और इस मामले में न्याय की मांग को लेकर जनता और राजनीतिक दल सक्रिय रूप से सामने आ रहे हैं।





