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भारत के साथ आतंकवाद पर खड़ा अमेरिका, लेकिन जनरल बोले- पाकिस्तान से भी रिश्ते जरूरी

अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी |

भारत के साथ आतंकवाद पर खड़ा अमेरिका, लेकिन जनरल बोले- पाकिस्तान से भी रिश्ते जरूरी
फोटो: भारत के साथ आतंकवाद पर खड़ा अमेरिका, लेकिन जनरल बोले- पाकिस्तान से भी रिश्ते जरूरी
अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अपने मजबूत समर्थन की पुष्टि की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। इस बीच, एक शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस्लामिक स्टेट-खोरासान प्रांत (IS-KP) जैसे खतरों से निपटने में पाकिस्तान सेना की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने मंगलवार को जानकारी दी कि उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने बीते सप्ताह कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उन्होंने आतंकवाद से लड़ाई में भारत को अमेरिकी समर्थन दोहराया और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख जनरल माइकल कुरिल्ला ने मंगलवार को हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के समक्ष बयान देते हुए पाकिस्तान को "आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम साझेदार" बताया। जनरल कुरिल्ला ने कहा, "26 अगस्त 2021 को काबुल एयरपोर्ट के एबी गेट पर हुए आत्मघाती हमले के पीछे मुख्य योजनाकार IS-KP के मोहम्मद शरीफुल्लाह की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण पाकिस्तानी भागीदारी के कारण संभव हो पाया।" 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका को भारत और पाकिस्तान दोनों से संबंध बनाए रखने की आवश्यकता है, “मैं नहीं मानता कि अगर अमेरिका भारत के साथ खड़ा है तो इसका मतलब यह हो कि वह पाकिस्तान से दूरी बना ले। दोनों देशों के साथ रिश्ते ज़रूरी हैं।”

टैमी ब्रूस ने यह भी जानकारी दी कि बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व में एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में वाशिंगटन का दौरा किया और विदेश विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की। इसमें राजनीतिक मामलों की अवर सचिव एलिसन हुकर भी शामिल थीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका को पाकिस्तान की ओर से आतंकियों के खिलाफ किसी ठोस कार्रवाई का आश्वासन मिला है, तो उन्होंने कहा कि इन बैठकों की गोपनीय प्रकृति को देखते हुए वह कोई विवरण साझा नहीं कर सकतीं। कश्मीर मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश के सवाल पर ब्रूस ने कहा, “मैं उनकी योजनाओं पर टिप्पणी नहीं कर सकती। दुनिया उनके स्वभाव से परिचित है और मैं इसमें कुछ नहीं जोड़ना चाहती।”