सुप्रीम कोर्ट ने अशोका विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अली खान महमूदाबाद की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। यह याचिका हरियाणा पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी। प्रोफेसर अली खान पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ की गई एयर स्ट्राइक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका जताई गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले का उल्लेख सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के समक्ष किया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई कर रहे हैं। सिब्बल ने आग्रह किया कि इस संवेदनशील मामले की जल्द सुनवाई होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि वह 20 या 21 मई को मामले की सुनवाई करेगा।
प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद का शैक्षणिक और पारिवारिक इतिहास भी उल्लेखनीय रहा है। उनका जन्म 2 दिसंबर 1982 को हुआ था। लखनऊ के प्रतिष्ठित ला मार्टिनियर कॉलेज से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद वे इंग्लैंड चले गए, जहां उन्होंने किंग्स कॉलेज स्कूल और फिर विनचेस्टर कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वे अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी सक्रिय रहे हैं। 2018 में समाजवादी पार्टी से जुड़ने के बाद वे 2019 से 2022 तक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रहे। हालांकि, 2022 के बाद से उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली और किसी भी पार्टी पद पर नहीं रहे।
अली खान महमूदाबाद का संबंध उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित महमूदाबाद राजघराने से है। वे मोहम्मद आमिर मोहम्मद खान उर्फ राजा साहिब महमूदाबाद के पुत्र हैं, जिन्होंने शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत जब्त की गई अपनी पैतृक संपत्तियों को वापस पाने के लिए दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। राजा साहिब के नाम से मशहूर उनके पिता ने भारत में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर दो बार विधायक के रूप में भी काम किया था और अवध क्षेत्र में एक लोकप्रिय नेता के तौर पर जाने जाते थे। महमूदाबाद परिवार की संपत्तियां लखनऊ, सीतापुर और नैनीताल तक फैली हुई हैं, जिनमें लखनऊ का प्रसिद्ध बटलर पैलेस, हजरतगंज का बड़ा हिस्सा, हलवासिया मार्केट और महमूदाबाद किला शामिल हैं। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत कई हजार करोड़ रुपये आंकी जाती है।
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