अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख का समर्थन
वहीं, इस विधेयक का समर्थन करते हुए अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (एआईएसएससी) के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को आवश्यक बताया। चिश्ती ने कहा, "मुझे विश्वास है कि मौजूदा वक्फ अधिनियम में बदलाव की जरूरत है और मुसलमानों को इससे डरने की कोई वजह नहीं है। जब सरकार कह रही है कि यह समुदाय के खिलाफ नहीं है और मस्जिदों, दरगाहों को जब्त नहीं किया जाएगा, तो हमें आधिकारिक बयानों पर ही विश्वास करना चाहिए।"
चिश्ती ने यह भी कहा कि सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट किया है कि वक्फ बोर्ड के तहत आने वाली दरगाहों और मस्जिदों को जब्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था, "विधेयक के प्रस्ताव के बाद, उम्मीद है कि बदलाव अच्छे होंगे, और इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजे जाने के बाद इस पर चर्चा होगी।" वहीं कांग्रेस सांसद और वक्फ (संशोधन) विधेयक पर जेपीसी के सदस्य इमरान मसूद ने सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती पर बीजेपी के लिए 'दलाली' करने का आरोप लगाया।
मसूद ने कहा, "यह दलाली बंद करे बीजेपी की।" उनका आरोप था कि चिश्ती बीजेपी के पक्ष में बयान दे रहे हैं, जो उचित नहीं है। वक्फ (संशोधन) विधेयक, जिसे एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास (यूएमईईडी) विधेयक भी कहा जाता है, का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण, बेहतर ऑडिट, पारदर्शिता बढ़ाने और अवैध रूप से कब्जाई गई संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी उपाय लागू करना है।
वक्फ अधिनियम 1995 की आलोचना लंबे समय से कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और अतिक्रमण जैसे मुद्दों के लिए की जाती रही है, और इस विधेयक के तहत उन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है।
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