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90 फीसदी भारतीय जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित- रिपोर्ट

करीब 92 फीसदी भारतीय जलवायु परिवर्तन को या तो बेहद महत्वपूर्ण, बहुत महत्वपूर्ण या कुछ हद तक महत्वपूर्ण मानते हैं। 53 फीसदी लोगों के अनुसार जलवायु परिवर्तन पहले से ही लोगों को नुकसान पहुंचा रही है।

90 फीसदी भारतीय जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित- रिपोर्ट
फोटो: 90 फीसदी भारतीय जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित- रिपोर्ट
एक सर्वेक्षण में पता चला है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर 90 फीसदी भारतीय चिंतित हैं। येल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज कम्युनिकेशन(वाईपीसीसीसी) और सेंटर फॉर वोटिंग ओपिनियन एंड ट्रेंड्स इन इलेक्शन रिसर्च (सीवोटर्स) द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया कि भारतीय जलवायु परिवर्तन के बारे में तेजी से जागरूक हो रहे हैं, लेकिन देश भर में इसकी धारणाओं और समझ के बारे में काफी अंतर है। सर्वेक्षण में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन के बारे में वास्तव में जनता की राय, वैज्ञानिकों के संदेश, स्थानीय वास्तविकताओं और सामाजिक-आर्थिक के जटिल अंतर्संबंध से बनती है।


 जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य की पीढियां होंगी प्रभावित


सर्वेक्षण में भाग लेने वाले लोगों में से आधे से ज्यादा लोगों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। 2,178 वयस्कों के बीच किए गए सर्वेक्षण में पता चलता है कि करीब 92 फीसदी भारतीय जलवायु परिवर्तन को या तो बेहद महत्वपूर्ण, बहुत महत्वपूर्ण या कुछ हद तक महत्वपूर्ण मानते हैं। 53 फीसदी लोगों के अनुसार जलवायु परिवर्तन पहले से ही लोगों को नुकसान पहुंचा रही है। जबकि कुछ लोगों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन जानवरों और पेड़ों की प्रजातियों को नुकसान पहुंचाएगा साथ ही भविष्य की पीढ़ियों को भी प्रभावित करेगा।


जलवायु परिवर्तन की धारणाएं बहुत सूक्ष्म हैं

सर्वेक्षण के सह-लेखक और टेक्सास ए.एंड.एम फॉरेस्ट सर्विस में भू-स्थानिक डेटाबेस प्रशासक नागा रघुवीर मोडाला कहते हैं, “सर्वेक्षण के दौरान हमें यह देखकर काफी हैरानी हुई कि भले ही भारत अविश्वसनीय रूप से विविधतापूर्ण है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के बारे में लोगों के विचार कई मामलों में काफी स्थिर हैं।” रघुवीर ने बताया कि भारत के लोग जलवायु परिवर्तन में जीवाश्म ईंधन की भूमिका को अब अच्छे से समझने लगे हैं। सर्वेक्षण से जलवायु परिवर्तन की धारणाओं में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय अंतर भी सामने आते हैं। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे कुछ क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता का स्तर अधिक है तो वहीं उत्तर प्रदेश के खीरी जैसे कम शहरी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बारे में बहुत कम ही जानते हैं।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर राधिका खोसला ने सर्वेक्षण को लेकर कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन की धारणाएं बहुत सूक्ष्म हैं और भारत में जलवायु और शिक्षा नीतियों को बेहतर ढंग से सूचित करने तथा उनका समर्थन करने के लिए अधिक क्षेत्रीय रूप से अनुकूलित शैक्षिक संसाधनों की आवश्यकता है।

क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता और सर्वेक्षण के मुख्य लेखक जगदीश ठाकुर ने कहा कि जहां कई भारतीय जलवायु परिवर्तन से चिंतित हैं, वहीं बारीकियों को समझने में एक अंतर है। वह बताते हैं कि जागरूकता की कमी का मतलब यह नहीं है कि वे इसके बारे में चिंतित नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि वे नहीं जानते कि इसे जलवायु परिवर्तन कहा जाता है और यह मानवीय गतिविधियों के कारण होता है। वहीं, भारत सहित अन्य 27 देशों के एक अध्ययन में पाया गया कि मनुष्य के कारण जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक सहमति की जानकारी से गलत धारणाएं काफी कम हो जाती हैं और इसके अस्तित्व और कारणों में विश्वास थोड़ा बढ़ जाता है।