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बैंकों में 78 हजार करोड़ रुपये बिना दावे के जमा, जानिए अब क्या होगा इस राशि का?

चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि सरकारी बैंकों में पिछले दस वर्षों के दौरान 78 हजार करोड़ रुपये ऐसे ही बिना दावे के पड़े रह गए। इनमें से 45 हजार |

बैंकों में 78 हजार करोड़ रुपये बिना दावे के जमा, जानिए अब क्या होगा इस राशि का?
फोटो: बैंकों में 78 हजार करोड़ रुपये बिना दावे के जमा, जानिए अब क्या होगा इस राशि का?
अक्सर लोग अपने बैंक खातों में जमा पैसों पर नजर रखते हैं—ब्याज कितना बढ़ा, कुल राशि कितनी हो गई। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ खातों में पड़ा धन बिना दावे के वर्षों तक बैंक में ही रह जाता है? चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि सरकारी बैंकों में पिछले दस वर्षों के दौरान 78 हजार करोड़ रुपये ऐसे ही बिना दावे के पड़े रह गए। इनमें से 45 हजार करोड़ रुपये को विशेष फंड में ट्रांसफर कर दिया गया है। यह खुलासा हाल ही में वित्त मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए आंकड़ों से हुआ।

बिना दावे की राशि कहां गई?


वित्त मंत्रालय के अनुसार, 2019-20 से 2024-25 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 45,706 करोड़ रुपये को ‘डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड’ (DEAF) में ट्रांसफर कर दिया। यह वे पैसे हैं जो वर्षों से बैंकों में बिना किसी दावे के पड़े थे। दरअसल, ऐसे बचत और चालू खाते जिनमें दस वर्षों तक कोई लेन-देन नहीं होता, या फिर वे फिक्स्ड डिपॉजिट जो परिपक्वता (मैच्योरिटी) के दस साल बाद भी भुनाए नहीं जाते, उन्हें ‘अनक्लेमड डिपॉजिट’ यानी ‘बिना दावे की जमा राशि’ माना जाता है। इस स्थिति में बैंक उस राशि को DEAF में स्थानांतरित कर देते हैं।

हालांकि, ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि यदि किसी का पैसा इस फंड में चला गया है, तो वह अब भी उसे वापस पा सकता है। इसके लिए खाताधारकों को अपने बैंक में जमा से जुड़े जरूरी दस्तावेज़, जैसे पासबुक, फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद या कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (यदि खाताधारक का निधन हो चुका है) प्रस्तुत करने होंगे। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे अपनी राशि वापस प्राप्त कर सकते हैं।

RBI पोर्टल से करें दावा


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इस समस्या को हल करने के लिए एक विशेष पोर्टल लॉन्च किया है। पिछले साल लॉन्च किया गया ‘अनक्लेमड डिपॉजिट गेटवे टू एक्सेस इनफॉरमेशन पोर्टल’ खाताधारकों को उनके बिना दावे की राशि और खाते की जानकारी खोजने में मदद करता है। अभी तक 30 बैंक इस पोर्टल से जुड़ चुके हैं, और अन्य बैंकों को भी जल्द ही जोड़ा जाएगा। यदि आपको संदेह है कि आपका पैसा भी बिना दावे के पड़ा हो सकता है, तो आप इस पोर्टल के माध्यम से अपने खाते की जानकारी हासिल कर सकते हैं और आवश्यक दस्तावेज़ दिखाकर अपनी राशि वापस ले सकते हैं। यह पहल उन ग्राहकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है, जिन्होंने वर्षों से अपने निष्क्रिय खातों पर ध्यान नहीं दिया था। 

डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड योजना 2014 में शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य उन जमाकर्ताओं (या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों) को जागरूक करना था, जो वर्षों से अपनी राशि के बारे में भूल गए हैं। सरकार और RBI की यह पहल उन लोगों के लिए राहतभरी है, जो वर्षों से अपने निष्क्रिय बैंक खातों में जमा राशि को लेकर अनजान थे।