गौरतलब है कि केंद्र सरकार का यह ज़वाब ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले यानी सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने पीएमएलए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखने वाले 27 जुलाई, 2022 के फैसले की समीक्षा की मांग करने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट एक बार फिर विचार करेगा कि क्या धन शोधन अपराधों में गिरफ्तारी, तलाशी, कुर्की और जब्ती के संबंध में ईडी की शक्तियों से निपटने वाले प्रावधानों और संशोधित पीएमएलए संवैधानिक वैधता रखता है या नहीं।
धन शोधन निवारण अधिनियम ( पीएमएलए) को 2002 में अधिनियमित किया गया, और 1 जुलाई 2005 से लागू किया गया था।
ईडी के मामलों पर केंद्र
नित्यानंद राय ने कहा कि 2019 में पीएमएलए के तहत 188 मामले, 2020 में 708, 2021 में 1,166, 2022 में 1,074, 2023 में 934 और 2024 में 31 जुलाई तक 397 मामले दर्ज किये गये। जबकि 2014 में 195 मामले, 2015 में 148, 2016 में 170 और 2017 में 171 मामले दर्ज किये गये थे।
पीएमएलए को 2019 तक चार बार (2009, 2013, 2015 और 2019) संशोधित किया गया है। 2009 में किये गये संशोधन के तहत आपराधिक साजिशों को भी पीएमएलए के दायरे में लाया गया था। इसने पिछले कुछ वर्षों में ईडी को किसी भी मामले में प्रवेश करने की अनुमति दी है, भले ही मुख्य अपराध पीएमएलए अनुसूची के दायरे में न आता हो। ईडी ने नेताओं के ऊपर 2019 में 15 ईसीआईआर यानी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले दर्ज किये, इसके बाद 2020 में 28, 2021 में 26, 2022 में 34, 2023 में 26 और 2024 में तीन (31 जुलाई तक) मामले दर्ज किये।
मंत्री ने कहा कि पीएमएलए के तहत जब्त की गई आय का कुल मूल्य लगभग 3,725.76 करोड़ रुपये है, पीएमएलए के तहत फ्रीज की गई राशि लगभग 4,651.68 करोड़ रुपये है और पीएमएलए के तहत कुर्क की गई संपत्ति लगभग 1,31,375 करोड़ रुपये है।





