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एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा सांसद धर्मेंद्र यादव समेत 29 लोगों को बरी किया

धर्मेंद्र पर आरोप था कि 2022 में उतर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कोविड के नियमों के खिलाफ और बिना इजाजत चुनावी कार्यक्रम कर रहे थे।

एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा सांसद धर्मेंद्र यादव समेत 29 लोगों को बरी किया
फोटो: एमपी-एमएलए कोर्ट ने सपा सांसद धर्मेंद्र यादव समेत 29 लोगों को बरी किया
 2022 में उतर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कोविड  नियमों के खिलाफ बिना इजाजत चुनावी कार्यक्रम करने के मामले में आजमगढ़ से सांसद धर्मेंद्र यादव सहित 29 आरोपितों को अदालत ने आज बरी कर दिया। बदायूँ  एमपी एलए कोर्ट से आये इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें षड्यंत्र के तहत फंसाया गया था। धर्मेंद्र यादव बदायूँ से भी सांसद रह चुके हैं।


प्रशासन ने बीजेपी के दबाव में की कार्रवाई

धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उन्हें इस मामले में प्रशासन ने बीजेपी के दबाव में फँसाया था लेकिन कोर्ट ने उनके साथ न्याय किया है। उन्होंने कहा कि इस समय विपक्ष को संविधान के माध्यम से अदालतें ही बचा रही है  इसीलिए समूचा विपक्ष संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश की जनता ने विपक्ष का साथ दिया है। नीट परीक्षा पर धर्मेंद्र यादव ने कहा कि बहुत दुख होता है जब सत्ता पक्ष के विधायक का वीडियो जनता के सामने आता है जिसमें वह पेपर लीक की बात कर रहा है। बुलडोजर से न्याय करने वाली सरकार ऐसे लोगों पर बुलडोज़र क्यों नही चलाती है। धर्मेंद्र यादव ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सुनियोजित तरीके से पेपर लीक किये जा रहे हैं और सत्ता से जुड़े लोग करोड़ों रुपये का लेनदेन कर रहे हैं।


प्रचंड बहुमत से इंडिया गठबंधन को जिताया

धर्मेंद्र  यादव ने ख़ुशी जतायी कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बनाये पीडीएफ़ फ़ार्मूले पर उत्तर प्रदेश की जनता ने न सिर्फ मोहर लगायी बल्कि प्रचंड बहुमत से इंडिया गठबंधन को जिताया भी। निश्चित तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव में न सिर्फ पीडीए पर अमल किया जाएगा बल्कि अन्य लोगों को भी इस फार्मूले में शामिल किया जाएगा । 

धर्मेंद्र यादव ने आपातकाल पर कहा कि अखिलेश यादव ने संसद में कहा कि जो घटना 50 या 49 साल पहले हुई, उस पर कांग्रेस ने खुद अफसोस जताया है। आज 50 साल पुरानी बात पर बहस हो कि नौजवानों की तक़लीफ़ देखी जाए। लोकसभा चुनाव में अगर बेईमानी न होती तो बीजेपी यूपी में 20 सीटें भी नहीं जीत पाती।