कोर्ट ने शरजील के भाषण को जहरीला करार दिया
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि शरजील इमाम ने 13 दिसंबर 2019 को दिए गए अपने भाषण के जरिए भीड़ को भड़काने की कोशिश की थी। कोर्ट ने माना कि शरजील का उद्देश्य बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और चक्का जाम के जरिए सामान्य जनजीवन को बाधित करना था। उन्होंने उत्तर भारत के राज्यों में मुसलमानों की बड़ी आबादी का हवाला देते हुए कहा था कि आखिर अब तक चक्का जाम क्यों नहीं किया गया।
कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि शरजील इमाम ने अपने भाषण में चतुराई के साथ शब्दों का चयन किया, ताकि वह सीधे तौर पर किसी का नाम लिए बिना भीड़ को भड़काने में कामयाब हो सकें। अदालत के अनुसार, यह भाषण पूरी तरह समाज को विभाजित करने और एक धर्म को दूसरे धर्म के खिलाफ खड़ा करने वाला था।
कोर्ट ने चक्का जाम को लेकर क्या कहा?
अदालत ने चक्का जाम की घटना को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों के कारण राष्ट्रीय राजधानी जैसे बड़े शहरों में हालात गंभीर रूप से बिगड़ सकते हैं। चक्का जाम के कारण एंबुलेंस सेवाएं, पुलिस और अन्य आपातकालीन सेवाओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यह स्थिति अप्रत्यक्ष रूप से गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में आ सकती है।
अदालत ने आगे कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होकर हिंसक प्रदर्शन करते हैं तो यह कोई आकस्मिक घटना नहीं हो सकती, बल्कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा होती है। कोर्ट ने साफ किया कि शरजील इमाम का भाषण भी इसी साजिश का हिस्सा था, जिसमें उन्होंने खास समुदाय के लोगों को चक्का जाम के लिए प्रेरित किया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पास हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान बसों में आगजनी, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं सामने आई थीं। आरोप है कि शरजील इमाम ने इन प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देकर लोगों को उकसाने और चक्का जाम करने के लिए प्रेरित किया था।
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