हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आजीवन कारावास की सजा के बावजूद यह एक महत्वपूर्ण कदम है और न्याय की जीत के रूप में इसे देखा जाना चाहिए। काहलों ने अपने बयान में कहा, "हमें दुख है कि सज्जन कुमार को मौत की सजा नहीं दी गई। अगर उन्हें फांसी की सजा दी जाती, तो हम अधिक संतुष्ट महसूस करते। फिर भी, हम न्याय की प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और अदालत के फैसले को स्वीकार करते हैं।"
सज्जन कुमार पर 1984 के सिख दंगों के दौरान दिल्ली में एक पिता-पुत्र की हत्या का आरोप था। यह मामला 41 साल पुराना है, और अब जाकर पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। अदालत ने फैसला सुनाने से पहले ही सिख समाज सज्जन कुमार के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहा था, लेकिन अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा दी है।
सज्जन कुमार पर आरोप था कि उन्होंने दंगों के दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था, जिसके कारण सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान चली गई थी।
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