महिला आरक्षण बिल पर PM का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना उनका अधिकार है, कोई एहसान नहीं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा और सभी महिलाओं को समान अवसर मिलेंगे।
विपक्ष का विरोध और सवाल
विपक्ष ने विधेयकों के समय और तरीके पर सवाल उठाए। संसद का विशेष सत्र में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन विधेयक के साथ जोड़ना सही नहीं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जनगणना और जाति गिनती में देरी का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि जनगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जाति के आधार पर भी गिनती होगी। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
सरकार के पास पर्याप्त बहुमत नहीं
लोकसभा में संवैधानिक संशोधन के लिए विशेष बहुमत यानी सदस्यों का दो-तिहाई वोट आवश्यक है। वर्तमान में सदन में 541 सदस्य हैं, जिससे 360 वोट चाहिए। NDA के पास कुल 293 सीटें हैं, जिसमें BJP के 240 और सहयोगी दलों के 53 सदस्य शामिल हैं। यह संख्या लक्ष्य से 67 वोट कम है। दूसरी ओर, गैर-NDA के पास 241 सदस्य हैं, जिसमें कांग्रेस के 98 सांसद शामिल हैं। यदि विपक्ष एकजुट होता है, तो संशोधन को रोकने की संभावना है।
वोटिंग आज शाम 4 बजे
लगभग 18 घंटे की बहस के बाद इन विधेयकों पर आज शाम 4 बजे मतदान होना है। यह मतदान न केवल महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि आगामी चुनावी रणनीतियों और संसद में सत्ता संतुलन पर भी असर डालेगा। फिलहाल सरकार ने राज्यों को भरोसा दिलाया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि विधेयक पास हो पाएगा या नहीं।
Read This Also:- महिला आरक्षण बिल: संसद में बहस और विपक्ष की आपत्तियां
Read This Also:- महिला आरक्षण बिल: संसद में बहस और विपक्ष की आपत्तियां





