NDA की ताकत: गणित में स्पष्ट बढ़त
उपराष्ट्रपति चुनाव महज औपचारिकता नहीं, बल्कि संसद में वास्तविक राजनीतिक शक्ति का विश्लेषण है। आज NDA यानी भाजपा‑सहयोगी गठबंधन के पास लोकसभा में लगभग 293 सांसद और राज्यसभा में लगभग 129 सांसद हैं, जिससे उनका कुल समर्थन 422 वोट तक पहुंचता है — जबकि जीत के लिए ज़रूरी संख्या सिर्फ 394 वोट है । इसका अर्थ है कि NDA को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है, जिससे उनका पलड़ा इस चुनाव में भारी दिखाई देता है। इस बढ़त के साथ ही NDA ने सी. पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है — एक ऐसे अनुभवी नेता, जो दक्षिण भारत (तमिलनाडु) से आते हैं और बीजेपी-आरएसएस से जुड़े रहे हैं । यह कदम यह दर्शाता है कि पार्टी संख्या के साथ-साथ वैचारिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखकर उम्मीदवार चुनना चाहती है।
इंडी गठबंधन की चुनौती: संदेश का खेल
इसी बीच विपक्षी इंडी गठबंधन (INDIA bloc) भी मैदान में सक्रिय है। कांग्रेस, DMK, TMC, RJD जैसे दल यह चुनाव एकता और लोकतांत्रिक मजबूती का संदेश देने का माध्यम बना रहे हैं। हालांकि उनकी संख्या NDA जितनी मजबूत नहीं है, फिर भी वे साझा उम्मीदवार को लेकर विपक्ष की एकता दिखाना चाह रहे हैं ।
उनके अनुमानित सांसदों का आंकड़ा 313–355 के बीच है, जो बहुमत से नीचे है। फिर भी, यह गठबंधन हार मानकर नहीं कराम करने के लिए लड़ रहा है, बल्कि लोकतंत्र में विपक्ष की सक्रियता को दर्शाने के लिए तैयारी कर रहा है । विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इस साझा उम्मीदवार को लेकर कई सहयोगियों से बातचीत कर रहे हैं ताकि पद या संख्या से ऊपर जाकर एकजुटता का संदेश दिया जा सके।





