Molitics Logo
होम राष्ट्रीय झारखंड की सोरेन सरकार छात्र आंदोलन के बीच बैकफुट पर क्यों है?
राष्ट्रीय

झारखंड की सोरेन सरकार छात्र आंदोलन के बीच बैकफुट पर क्यों है?

झारखंड छात्र आंदोलन: छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में पेपर लीक हुआ और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ियां की गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक कथित OMR शीट के....

झारखंड की सोरेन सरकार छात्र आंदोलन के बीच बैकफुट पर क्यों है?
फोटो: Jharkhand's Student Stir

झारखंड छात्र आंदोलन का बढ़ता दबाव

झारखंड में छात्रों का आंदोलन आज 17वें दिन प्रवेश कर गया है। यह प्रदर्शन राज्य में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोपों के खिलाफ चल रहा है। सोमवार को आंदोलन और उग्र हो गया, जब हजारों छात्रों ने रांची में झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया।


इस प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो, जो पिछले 9 दिनों से अनशन पर हैं, एंबुलेंस के माध्यम से विधानसभा मार्च में शामिल हुए। इस बीच, यह सवाल उठ रहा है कि हेमंत सोरेन की सरकार छात्रों के इस आंदोलन को समाप्त करने में असमर्थ क्यों है।


आंदोलन की शुरुआत और इसकी पृष्ठभूमि

छात्रों के आंदोलन की पृष्ठभूमि 19 अप्रैल को शुरू होती है, जब झारखंड लोक सेवा आयोग ने 103 वरिष्ठ प्रशासनिक पदों के लिए 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के बाद से ही अनियमितताओं के आरोप लगने लगे। 2 जुलाई को घोषित परिणाम में 2,204 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया, जबकि मुख्य परीक्षा की तिथि मात्र 17 दिन बाद निर्धारित की गई।


झारखंड छात्र आंदोलन: छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में पेपर लीक हुआ और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ियां की गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक कथित OMR शीट के अनुसार, 100 में से केवल 48 सवालों के उत्तर देने के बावजूद कुछ उम्मीदवार पास हो गए। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कई छात्रों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल में ले जाकर सवालों के जवाब याद कराए गए।


जांच की प्रक्रिया और छात्रों का प्रदर्शन

झारखंड छात्र आंदोलन: 21 जुलाई को मामले में FIR दर्ज की गई और CID ने JPSC की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL के कर्मचारियों सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया। JPSC ने TDPL को मई 2025 में अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया था, फिर भी उसे परीक्षा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। विवाद बढ़ने पर 22 जुलाई को JPSC के अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया।


25 जुलाई को छात्रों ने रांची के मोराहबादी में प्रदर्शन शुरू किया और 28 जुलाई को यह आंदोलन रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंच गया। 2 अगस्त से देवेंद्र महतो ने भूख हड़ताल शुरू की, जिसमें अन्य छात्र भी शामिल हुए।


छात्रों की मांगें और सरकार के साथ बातचीत

झारखंड छात्र आंदोलन: छात्रों की मुख्य मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने और अनियमितताओं की जांच CBI या ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग शामिल है। इसके अलावा, TDPL द्वारा कराई गई सभी परीक्षाएं रद्द करने, भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने और मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग भी की गई है।


5 अगस्त को सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की समिति गठित की। 9 अगस्त को तीसरे दौर की बातचीत के बाद सरकार ने JPSC परीक्षा रद्द करने पर सहमति दी, लेकिन छात्रों ने कहा कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।


Read This Also:- तमिल थाई वाल्तू हुआ अनिवार्य, तमिलनाडु में प्रस्ताव अब पारित