भारत में उड़ानें रद्द होने की खबरें तेज
इंडिगो ने अपनी 2,200 से ज़्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में से ज़्यादातर का संचालन जारी रखा है।जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बुकिंग खुली रखने के पीछे की वजह साफ़ है। जिसमें एयरलाइन ने अपना पूरा नेटवर्क बंद नहीं किया है।
इन व्यवधानों का असर कुछ खास रूटों हवाई अड्डों और तारीखों पर पड़ा है। जिसमें शुक्रवार को अब तक का सबसे बुरा दिन माना जा रहा है, हालांकि भारत में उड़ानें रद्द होने की खबरें आने के बाद इंडिगो की 1,000 से ज़्यादा उड़ानें रद्द कर दी गईं, तब दिल्ली से सभी घरेलू उड़ानें रद्द कर दी थी और जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
इंडिगो की मौजूदा समस्याओं के बावजूद, इंडिगो का व्यापक शेड्यूल चालू है, यही वजह है कि टिकटों की बिक्री बंद नहीं हुई। एयरलाइन ने परिचालन को उस स्तर तक कम नहीं किया, जिससे बुकिंग पूरी तरह से रोकनी पड़े।
वहीं इंडिगो ने इस अव्यवस्था के लिए "अनेक अप्रत्याशित परिचालन चुनौतियों" को जिम्मेदार ठहराया है, जिसमें छोटी-मोटी तकनीकी गड़बड़ियां, शीतकालीन कार्यक्रम में बदलाव, भीड़भाड़ और मौसम की स्थिति शामिल हैं।
इंडिगो के परिचालन संबंधी मुद्दे
भारत में उड़ानें रद्द होने की खबरों के बाद इंडिगो के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इंडिगो द्वारा जारी नियमों के कारण कंपनी की बड़ी संख्या में पायलटों को अनिवार्य रूप से आराम करना पड़ा, उसी दौरान एयरलाइन ने 26 अक्टूबर के दिन अपनी शीतकालीन उड़ान अनुसूची में वृद्धि की थी।
स्थिति तब और खराब हो गई जब एयरबस ए 320 के सॉफ्टवेयर संबंधी परामर्श के कारण सप्ताहांत में देरी हुई, लेकिन उड़ानें आधी रात के बाद भी चलती रहीं और जिससे नई विश्राम आवश्यकताएं लागू होने के बाद उड़ानों को रद्द करने की बाढ़ आ गई।
इसके अलावा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नए FDTL नियमों के एक कड़े प्रावधान को वापस ले लिया, जिसमें कहा गया था कि "किसी भी छुट्टी को साप्ताहिक आराम के बदले नहीं दिया जाएगा।" नियामक ने कहा कि यह निर्णय चल रहे परिचालन व्यवधानों और एयरलाइनों द्वारा राहत की मांग करते हुए कई बार किए गए अनुरोधों के बाद लिया गया है। यह बदलाव तुरंत प्रभावी हो गया, जिससे चालक दल की पुनर्व्यवस्था और सेवाएँ बहाल करने का प्रयास कर रही एयरलाइनों को कुछ राहत मिल गई।
इंडिगो की राष्ट्रव्यापी उड़ान सेवा में शनिवार को थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन स्थिति गंभीर बनी रही और कर्मचारियों की कमी और परिचालन संबंधी बढ़ते संकट के कारण 500 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गईं। वही दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सबसे अधिक व्यवधान की सूचना सामने आने लगी। जिसमें यात्रियों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा।
इंडिगो ने परिचालन पूरी तरह से स्थिर करने के लिए 10 फ़रवरी 2026 तक का समय मांगा है और आने वाले दिनों में उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। भारत में उड़ानें रद्द होने की खबरें तूल पकड़ती जा रही हैं और एयरलाइन ने बार-बार माफ़ी मांगी है और यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जाँच जरूर करें, ज़रूरी सामान साथ रखें और लचीली या वापसी योग्य बुकिंग पर एक बार विचार करें।
दबाव बढ़ने के साथ ही पायलट समूहों ने डीजीसीए से आग्रह किया है कि एयरलाइनों के कार्यक्रम को तभी मंजूरी दी जाए, जब एयरलाइन कंपनियां पर्याप्त चालक दल संख्या प्रदर्शित कर दें। साथ ही चेतावनी दी है कि व्यावसायिक मांगों के कारण सुरक्षा-संचालित थकान नियमों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इंडिगो ने पिछले वित्तीय वर्ष में 118 मिलियन यात्रियों को यात्रा कराई थी, लेकिन अब एक चुनौतीपूर्ण वास्तविकता का सामना कर रही है।
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