कौन हैं सादिक पहलवान
सादिक पहलवान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और दावणगेरे दक्षिण क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे चार दशक से अधिक समय तक कांग्रेस के साथ जुड़े रहे और दिवंगत नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के करीबी सहयोगी रहे। अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व की अनदेखी के खिलाफ उन्होंने मुखर होकर विरोध किया। इसी कारण उन्होंने टिकट न मिलने पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का मन बनाया था।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया मनाने का प्रयास
सादिक पहलवान को राजी करने के लिए खुद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सादिक पहलवान से मुलाकात की। चर्चा के दौरान पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया गया। CM ने कहा कि उन्होंने सादिक को कई सालों से जाना है और उनके अनुभव और कद को देखते हुए उन्हें मनाना जरूरी था। इसके परिणामस्वरूप सादिक ने कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ शमनूर मल्लिकार्जुन का समर्थन करने का आश्वासन दिया।
बंद कमरे में हुई महत्वपूर्ण चर्चा
सादिक पहलवान और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के साथ लगभग एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में पहलवान ने कुछ शर्तों के साथ कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने का निर्णय लिया। इससे पार्टी की ‘एकजुट मोर्चा’ पेश करने की रणनीति को मजबूती मिली। इस कदम से न केवल दावणगेरे दक्षिण में बल्कि बागलकोट में भी कांग्रेस की स्थिति मजबूत हो सकती है।
उपचुनाव की पृष्ठभूमि
यह उपचुनाव पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण हो रहा है। कांग्रेस अब 9 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव में BJP की चुनौती का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयारी कर रही है। सादिक पहलवान के समर्थन से पार्टी को अपने पारंपरिक वोट बैंक में एकजुटता बनाए रखने में मदद मिली है और त्रिकोणीय मुकाबले की आशंका टली।
सादिक पहलवान को मनाने का कदम कांग्रेस के लिए समय पर लिया गया रणनीतिक निर्णय साबित हो सकता है। इससे न केवल उपचुनाव में जीत की संभावना बढ़ी है, बल्कि पार्टी के अंदरूनी मतभेद भी प्रभावी ढंग से सुलझाए गए हैं।
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