इन सीटों पर उपचुनाव इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राज्यसभा सांसद Sukhendu Sekhar Roy, Sushmita Dev और Prakash Chik Baraik ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने रिक्त सीटों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
Mamata Banerjee, ECI: नामांकन से पहले आयोग पर बढ़ा दबाव
Ritabrata Banerjee TMC: चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, राज्यसभा उपचुनाव के लिए 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। यदि Mamata Banerjee और Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले दोनों गुट अलग-अलग उम्मीदवार उतारते हैं, तो आयोग के सामने यह तय करने की स्थिति बन सकती है कि आधिकारिक तौर पर TMC का उम्मीदवार कौन होगा।
यदि समय रहते विवाद का समाधान नहीं होता, तो आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अस्थायी रोक लगाकर दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान देने का विकल्प भी अपना सकता है।
फॉर्म 22A भी बन सकता है विवाद की वजह
इस पूरे विवाद में 'फॉर्म 22A' भी अहम भूमिका निभा सकता है। राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक दल अपने अधिकृत एजेंट की नियुक्ति के लिए इस फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जो विधायकों के मतपत्रों के सत्यापन से जुड़ा होता है।
अगर दोनों गुट अलग-अलग अधिकृत एजेंट नियुक्त करते हुए अलग-अलग फॉर्म जमा करते हैं, तो चुनाव आयोग को मतदान से पहले यह तय करना पड़ेगा कि किस गुट का दावा वैध माना जाए।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने जताई यह संभावना
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त S.Y. Quraishi का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव आयोग पार्टी के नाम और उसके चुनाव चिह्न 'जुड़वां फूल' को अस्थायी रूप से फ्रीज कर सकता है।
उनके अनुसार, अंतिम निर्णय आने तक दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी पहचान दी जा सकती है, जैसे 'TMC-M' और 'TMC-R'। इससे दोनों धड़े चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे, जबकि असली पार्टी को लेकर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा।
दोनों गुटों ने चुनाव आयोग में पेश किए अपने-अपने दावे
Mamata Banerjee से जुड़े संगठनात्मक विवाद में ECI ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों को निर्देश दिया था कि वे 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक अपने संगठनात्मक ढांचे, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और चुनाव चिह्न पर दावे के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज जमा करें।
निर्धारित समय सीमा के भीतर दोनों गुटों ने आयोग के समक्ष अपने-अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं। अब आयोग को इन दस्तावेजों का परीक्षण कर फैसला लेना है।
ममता गुट और बागी गुट के दावे आमने-सामने
West Bengal Politics: Mamata Banerjee गुट का कहना है कि पार्टी की National Working Committee का कार्यकाल वर्ष 2027 तक वैध है, इसलिए संगठन और चुनाव चिह्न पर उसका अधिकार बना हुआ है।
दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष पक्ष रखते हुए वरिष्ठ सांसद Kalyan Banerjee ने बागी गुट के इस दावे को खारिज किया कि कार्यकाल समाप्त हो चुका है। उन्होंने विरोधी गुट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari और पुलिस की मदद से पार्टी कार्यालय पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा किया।
दूसरी ओर, Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाला गुट खुद को वास्तविक TMC बता रहा है। उनका आरोप है कि पार्टी में व्यक्ति-पूजा और परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया, जिसके कारण संगठन में असंतोष पैदा हुआ। बागी गुट का दावा है कि उसे पार्टी के 80 विधायकों में से दो-तिहाई से अधिक का समर्थन प्राप्त है। साथ ही कई पूर्व मंत्री, पार्षद और जिला परिषद सदस्य भी उनके साथ हैं।
नई गठित National Working Committee के प्रमुख
Arup Roy ने भी कहा कि 22 जून की बैठक से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंप दिए गए हैं।
अगर फैसला नहीं आया तो बढ़ सकती है कानूनी पेचीदगी
यदि 14 जुलाई तक चुनाव आयोग किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचता, तो दोनों गुट TMC के नाम से अपने-अपने उम्मीदवार उतारने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में रिटर्निंग अधिकारी एक या दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर सकते हैं, जिससे मामला अदालत तक पहुंचने की संभावना बन सकती है।
Mamata Banerjee गुट से जुड़े राज्यसभा चुनाव मामले में ECI के समक्ष दोनों पक्षों ने दावा किया है कि उनके पास उम्मीदवार के नामांकन के लिए जरूरी समर्थन मौजूद है, जबकि नियमों के अनुसार कम से कम 10 विधायकों या निर्वाचन मंडल के 10 प्रतिशत सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है।
शिवसेना विवाद जैसा दोहराया जा सकता है घटनाक्रम
इस तरह का मामला पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2022 में शिवसेना दो गुटों में बंट गई थी। उस समय चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिह्न और नाम अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया था और दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी।
मुंबई की अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में यही व्यवस्था लागू की गई थी। बाद में लगभग चार महीने बाद, 17 फरवरी 2023 को चुनाव आयोग ने अंतिम फैसला सुनाते हुए शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न Eknath Shinde के नेतृत्व वाले गुट को सौंप दिया।
अब पश्चिम बंगाल में TMC को लेकर पैदा हुए विवाद में भी आयोग के सामने लगभग वैसी ही स्थिति है। ऐसे में सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले चुनाव आयोग क्या फैसला लेता है और किस गुट को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता मिलती है।
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