ट्रेन रद्द करने का निर्णय
भारत की राजनीति में एक नया मोड़ लेते हुए, 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पूर्व दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने की आलोचना की है। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन का कहना है कि यह कदम मोदी सरकार की युवाओं के प्रति डर को दर्शाता है।
अभिजीत दीपके, जो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक हैं, ने भी इस निर्णय की निंदा की और आरोप लगाया कि यदि सरकार युवा वर्ग से भयभीत है, तो उसे पूरे देश को बंद कर देना चाहिए।
माकपा ने उठाया कानूनी सवाल
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इन पाबंदियों को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। पार्टी के महासचिव एम ए बेबी ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।
इन पाबंदियों में दिल्ली आने वाली ट्रेनों का रद्द होना, मेट्रो स्टेशन बंद करना और इंटरनेट सेवाएं निलंबित करना शामिल है। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल बेबी की ओर से मामले में पैरवी कर रहे हैं।
प्रदर्शन का आह्वान
सीजेपी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के चलते मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है।
ओब्रायन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में पूर्वी रेलवे की घोषणा साझा की, जिसमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के रद्द होने की जानकारी दी गई थी। ये ट्रेनें शुक्रवार को रवाना होकर शनिवार को दिल्ली पहुंचने वाली थीं।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने भी दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) से 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने की अपील की है, जिससे युवाओं को प्रदर्शन में शामिल होने से रोका जा सके।
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने पाबंदियों की आलोचना करते हुए कहा, 'भारत सरकार ने कल दिल्ली बंद करने का आह्वान किया है। यह हास्यास्पद है।'





