भारत का राजनयिक विरोध और रणनीतिक उपाय
सरकार ने राजनयिक माध्यमों से इस घटनाक्रम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जब पूछा गया कि लद्दाख के भारतीय क्षेत्र को शामिल करते हुए चीन द्वारा दो नए काउंटी स्थापित करने के मुद्दे पर सरकार क्या रणनीतिक और कूटनीतिक कदम उठा रही है, तो मंत्री ने जवाब दिया,
"भारत सरकार चीन के होटन प्रांत में तथाकथित दो नए काउंटी की स्थापना की चीनी घोषणा से अवगत है। इन काउंटियों के कुछ हिस्से भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।"
इसके अलावा, भारत ने इन अवैध निर्माणों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के साथ ही, चीनी सरकार से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है या नहीं, इसका भी विवरण मांगा है।
विदेश राज्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विकास कार्यों में तेजी लाने पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि यह न केवल इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि भारत की रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को भी मजबूती देगा।
"भारत सरकार अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को प्रभावित करने वाले हर घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी," मंत्री ने कहा।
यह बयान भारत के संकल्प को दोहराता है कि वह अपनी संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और चीन के किसी भी अवैध कदम के खिलाफ कूटनीतिक और सामरिक रूप से मजबूती से खड़ा रहेगा।
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